हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , महिला धार्मिक मदरसे के सांस्कृतिक व तबलीग़ी मामलात के साथियों की अख़लाक़ी मुलाक़ातें हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रजबी उप प्रमुख की तकरीर के साथ हुईं।
हुज्जतुल इस्लाम रजबी ने सांस्कृतिक गतिविधियों पर "दफ़्तरी निगाह" के प्रभुत्व से आगाह करते हुए कहा,तहरीकी रूह और मक़सद-परस्ती से दूरी सांस्कृतिक काम का सबसे बड़ा नुक़सान है।
उन्होंने "इतिबारात" की व्याख्या करते हुए कहा: बहुत सारे पद और सामाजिक संबंध की हैसियत इतिबारी होती है। यह तब ख़तरनाक हो जाती है जब हम उन्ही को असल चीज़ समझ बैठें और हक़ीक़ी मसालेह को भुला दें।
सांस्कृतिक व तबलीग़ी मामलात के उप प्रमुख ने सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के "मुलाज़िम बन जाने" की आलोचना करते हुए कहा, जब जीविका, दफ़्तरी जगह और मफ़ाद रिसालत-ए-इलाही की जगह ले लें, तो सांस्कृतिक असर कम हो जाता है और नौजवान नस्ल से संबंध कमज़ोर पड़ जाते हैं।
अंत में हुज्जतुल इस्लाम रजबी ने नीयत-ए-इलाही की तरफ़ लौटने, इतिबारात के प्रति नज़रिया दुरुस्त करने और तहरीकी रूह को ताज़ा करने को सांस्कृतिक गतिविधियों की जवानी और उपज/स्थिरता का असली तरीक़ा बताया।

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