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ज़ुहूर में शीघ्रता के लिए इंतज़ार करने वालों के सामाजिक पक्ष
महदवियत के विशेषज्ञ और शोधकर्ता ने इमाम ज़माना (अ) के इंतज़ार करने वालों के उन सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला जो ज़ुहूर की तैयारी करने वाले समाज से संबंधित हैं।
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शहीद रहबर ने अपने पवित्र जीवन और अपनी शहादत के माध्यम से पूरी मुस्लिम उम्मत के सम्मान…
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद शहनशाह हुसैन नक़वी ने कहा: शहीद रहबर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार और नमाज़-ए-जनाज़ा में भाग लेना मेरे लिए एक ऐतिहासिक और कभी न भूलने वाला अनुभव था, जहाँ ईरानी जनता की एकता, वफ़ादारी और इस्लामी क्रांति के प्रति लगाव का अद्भुत दृश्य पूरी दुनिया ने देखा।
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शहीद सुप्रीम लीडर की अंतिम विदाई वैश्विक जागरूकता, प्रतिरोध की भावना और ईरान-भारत…
भारत के प्रसिद्ध शहर मुंबई की मस्जिद-ए-ईरानियान के इमाम-ए-जमाअत, प्रसिद्ध वक्ता और विचारक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद नजीबुल हसन ज़ैदी ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी को दिए गए विशेष साक्षात्कार में कहा कि शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई की विशाल अंतिम यात्रा केवल एक जनाज़ा नहीं थी, बल्कि जनता की निष्ठा, प्रतिरोध की विचारधारा और ईरान व भारत के गहरे सभ्यतागत एवं आध्यात्मिक संबंधों का ऐतिहासिक प्रतीक थी। उन्होंने कहा कि इस विशाल जनसमूह ने यह सिद्ध कर दिया कि महान व्यक्तित्व सीमाओं से ऊपर उठकर पूरी मानवता की साझा वैचारिक पूंजी बन जाते हैं।
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वर्तमान समाज के लिए हज़रत सय्यद उश शोहदा (अ) के आंदोलन का संदेश और सबक
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मुन्तज़री मुक़द्दम ने कहा: हज़रत सय्यद उश शोहदा इमाम हुसैन (अ) के व्यक्तित्व को आशूरा से अलग करके नहीं समझा जा सकता। आशूरा केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक संस्कृति-निर्माता और विचार-निर्माता तत्व है, जो व्यक्तियों और समाजों को सुस्ती और संवेदनहीनता से निकालकर उत्साह, उद्देश्य, स्वतंत्रता और जीवंतता की ओर ले जा सकता है।
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क़ुरआनी गेम "कलमा" का लोकार्पण / क़ुरआनी मफ़हूमो को सीखना हुआ आसान, आकर्षक और उपयोगी
मदरसा-ए-इल्मिया मदीनतुल इल्म, क़ुम के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के एक समूह ने क़ुरआनी गेम "कलमा" को डिज़ाइन और विकसित किया है।
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बराअत का दायरा अब बढ़कर साम्राज्यवाद के समर्थकों तक पहुँचा है
हज एवं ज़ियारत अनुसंधान संस्थान के प्रमुख ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हज में इबादत और राजनीति का मेल केवल इस्लामी गणराज्य ईरान की सोच नहीं है, बल्कि इसका आधार स्वयं इस्लाम में मौजूद है। उन्होंने कहा कि हज एक “पूर्ण जीवन-कार्यक्रम” है, जिसका दृष्टिकोण सभ्यतागत है, और यह बिना शत्रु-परिचय और “बराअत” के तत्व के पूरा नहीं हो सकता।
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अगर लोग "गदीर के दिन" की असली फजीलत जानते, तो फ़रिश्ते उनसे हर दिन दस बार हाथ मिलाते
ग़दीर का संदेश आज के मुस्लिम समाज के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह "सच्ची लीडरशिप की पहचान", "सच्ची लीडरशिप को स्वीकार करना" और "सच्चाई से जुड़ाव" पर ज़ोर देता है। ग़दीर अमीर अल-मुमिनीन हज़रत अली (अ) और उनकी इस्लामी लीडरशिप की खूबियों और अहमियत पर ज़ोर देता है।
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ग़दीर का संदेश मुस्लिम उम्माह के धर्म की एकता, मार्गदर्शन और पूर्णता की गारंटी है:…
महाराष्ट्र शिया उलेमा बोर्ड के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मुहम्मद असलम रिज़वी ने कहा है कि ईद-ए-गदीर इस्लामी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक दिन है, क्योंकि इस दिन अल्लाह तआला ने धर्म को पूरा किया और सभी पर अपनी कृपा बरसाई। ग़दीर का संदेश सिर्फ़ शियाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मुस्लिम उम्माह के लिए एकता, संरक्षकता, नेतृत्व और मार्गदर्शन का एक आम संदेश है, जिसे मुसलमानों के बीच नज़दीकी और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सही तरीके से पेश किया जा सकता है।
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शहीद नेता की नज़र में औरत और परिवार / केवल घरेलू भूमिका तक सीमित या पश्चिमी विचारधारा…
अंतर्राष्ट्रीय अल्लामह अस्करी विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक समिति की सदस्य और हौज़ा ए इल्मिया ख्वाहरान की शिक्षिका डॉ. रज़िया ज़ारेई ने शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब के "औरत के तीसरे मॉडल" के सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा: यह मॉडल न तो औरत को केवल घर तक सीमित देखना चाहता है और न ही उसे परिवार से दूर करना चाहता है, बल्कि परिवार और समाज में उसकी एक साथ पहचान पर जोर देता है, जहाँ हिजाब, पवित्रता, योग्यता, क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों का संरक्षण भी शामिल हो।
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ईरानी सरकार ने युद्ध मे भी जनता को किसी चीज़ की कोई कमी नही होने दी
जब जंग के हालात होते है तो उसमे आर्थिक चुनौतिया सामने आती है। महंगाई और बेरोज़गारी भी बढ़ती है। लेकिन यहा की सरकार का हमेशा से यह रहा है कि जनता की ज़रूरीयात पर पूरी नज़र होती है और काफ़ी मदद भी करती है और अबी भी किसी भी चीज़ की किसी भी प्रकार से कोई कमी नही होने दी है
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नहजुल बलाग़ा की दृष्टि में जब हमारा दुश्मन शांति का आह्वान करे तो हम क्या करें?!
नहजुल बलाग़ा के विशेषज्ञ ने कहा: इस्लाम की दृष्टि में शांति उस समय महत्व रखती है जब वह आक्रामकता के वास्तविक अंत और सुरक्षा की स्थापना का कारण बने, न कि खतरे के जारी रहने का कारण।
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आज का युद्ध तौहीद की प्रणाली और वैश्विक अत्याचारी शक्ति के बीच गहरा टकराव है / पश्चिम…
हौज़ा और यूनिवर्सिटी के शोध संस्थान के निदेशक ने इस बात पर जोर देते हुए कि इस्लाम जगत का वर्तमान युद्ध केवल भौतिक प्रकृति का नहीं है, इसे तौहीदी प्रणाली और तागूत के बीच गहरा टकराव बताया और कहा: सांस्कृतिक और आर्थिक युद्ध से लेकर सैन्य युद्ध तक, सभी साधनों का उपयोग इस्लामी शासन को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है और अनुभव ने दिखाया है कि विद्रोही दुश्मन के साथ विन-विन वार्ता का कोई अर्थ नहीं है।
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ईरान और भारत के संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत और आध्यात्मिक रिश्ता है:…
नई दिल्ली में ईरान के सांस्कृतिक सलाहकार डॉ. फ़रीदुद्दीन फ़रीदअस्र ने एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि ईरान और भारत के सभ्यतागत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का भविष्य राजनीतिक आदान-प्रदानों से कहीं अधिक गहरा है। दोनों देशों का रिश्ता हजारों वर्षों के साझा इतिहास, ज्ञान, साहित्य, आध्यात्मिकता और ज्ञान पर आधारित है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
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रमज़ान युद्ध और क्षेत्र में अमेरिका के उपस्थिति के अंत का दौर; ईरान इस जंग में विजयी…
इस बातचीत में राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ने हुई संधियों के विभिन्न पहलुओं, सुरक्षा गारंटियों और ईरान के वैश्विक शक्तियों के साथ भविष्य के संबंधों का विश्लेषण प्रस्तुत है।
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हजरत अबू तालिब अ.स. का मर्तबा और फज़ीलत
हौज़ा / हज़रत अबू तालिब अ.स. मक्के में उनका रुतबा एक महान सरदार, न्याय करने वाले और एक दूरदर्शी लीडर का था। ख़ाना-ए-काबा की चाबियाँ संभालना और हाजियों को पानी पिलाने का सम्मानित पद उनके पास था। मक्का के लोग अपने फ़ैसले उनसे करवाते थे और उनकी बात को पत्थर की लकीर माना जाता था।
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ईरान पर अमेरीकी और इजरायली हमले से संबंधित विशेष इंटरव्यू
क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, कुरआन और हदीस के रिसर्चर मौलाना सय्यद साजिद रज़वी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार ने ईरान पर अमेरीकी और इजरायली हमले से संबंधित विशेष इंटरव्यू किया। जिसमे मौलाना ने बड़े ही अच्छे और दिलचस्प रूप से जवाब देते हुए कहा कि इस समय अमेरिका जंग से भागने के रास्ता और बहाना ढूंढ रहे हैं और वे युद्ध से पीछे हटना चाहते हैं, लेकिन ईरान बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।
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शब-ए-क़द्र की रूहानियत और उसके आमाल, एक ख़ास बातचीत
शब-ए-क़द्र इस्लाम की सबसे मुकद्दस और बरकत वाली रातों में से एक है। 23वीं रात को ज़्यादा तवज्जो दी जाती है, क्योंकि कई रिवायतों में इसे शब-ए-क़द्र के तौर पर ज़्यादा क़रीब बताया गया है। यही वह रात है जिसमें क़ुरआन का नुज़ूल हुआ। इस रात इंसान के आने वाले साल के कई अहम फैसले अल्लाह के हुक्म से तय होते हैं। शब‑ए‑क़द्र का असली मक़सद यही है कि इंसान अपनी जिंदगी का जायज़ा ले और उसे बेहतर बनाने का फ़ैसला करे।
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एक महिला अपने चरित्र और कर्म से पूरे समाज को प्रभावित कर सकती है
पैग़म्बर मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की पत्नि उम्मुल मोमेनीन हज़रत खदीजा (स) के वफ़ात दिवस पर हौज़ा न्यूज़ के पत्रकार ने भारतीय लेखक और अहले बैत (अ) फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद तक़ी अब्बास कलकतवी से एक विशेष इंटरव्यू किया जोकि हज़रत ख़दीजा (स) की आध्यात्मिक महानता, त्याग, सब्र, विनम्रता और इस्लाम के लिए उनके अतुलनीय योगदान को उजागर करता है। जिसे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है।
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हज़रत खदीजा (स) ने दुनिया की चमक-दमक को ठुकराकर मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) को अपना जीवनसाथी…
भारत के प्रसिद्ध विद्वान और अंतर्राष्ट्रीय मुबल्लिग़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना ज़हूर महदी मौलाई से हौज़ा न्यूज़ के पत्रकार ने मोहसिना ए इस्लाम हज़रत खदीजातुल कुबरा की वफ़ात दिवस पर एक विशेष इंटरव्यू लिया जोकि हज़रत ख़दीजा (स) की आध्यात्मिक महानता, त्याग, सब्र, विनम्रता और इस्लाम के लिए उनके अतुलनीय योगदान को उजागर करता है। जिसे हम अपने प्रिय पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे है।
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सुप्रीम लीडर की सबसे प्रमुख विशेषता मानव सम्मान के आधार पर एक राष्ट्र और जीवन शैली…
भारतीय धार्मिक विद्वान हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद मंजूर आलम जाफ सिरसिवी ने इस्लामिक क्रांति की 47वीं वर्षगांठ, हाल के दंगों और सुप्रीम लीडर के नेतृत्व की महत्वपूर्ण विशेषताओं पर हौज़ा न्यूज़ एजेंसी से बात करते हुए ईरान की इस्लामी क्रांति के विषय पर प्रकाश डाला; प्रतिरोध, अंतर्दृष्टि और दृढ़ता की 47 साल की कहानी।