ताजा समाचार
अधिक देखी गई ख़बरें
गैलरी
لیستی صفحه سرویس هندی
-
कर्बला में हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम की सबसे बड़ी क़ुर्बानी उनकी बे-मिसाल वफ़ादारी…
हौज़ा / क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, कुरआन और हदीस के रिसर्चर मौलाना सय्यद साजिद रज़वी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार ने शाबान की ईदो के अवसर पर हज़रत अब्बास (अ) के जीवन से संबंधित विशेष इंटरव्यू किया। जिसमे मौलाना ने अलमदारे कर्बला की जीवन पर विस्तृत प्रकाश डाला।
-
किरदार ए ज़ैनबी को समाज में स्थापित किया जाना चाहिए
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद शहवार हुसैन नक़वी ने कहां,आज हमारे समाज को किरदार ए ज़ैनबी ज़रूरत है और इसको समाज में स्थापित किया जाना चाहिए।
-
हमारे देश का संविधान हमें अपने धार्मिक विश्वासों पर अमल करने और उसके प्रचार-प्रसार…
हौज़ा / जिस चीज़ को वे सिद्ध करना चाह रहे थे, यानी अल्लाह का वुजूद, उसे विज्ञान के मापदंड पर नहीं परखा जा सकता।अगर किसी ने विज्ञान का चश्मा उतार कर तर्क से समझने की कोशिश की होगी, तो निश्चित रूप से समझ में आया होगा। लेकिन जो ज्ञान का चश्मा लगाकर हर चीज़ को देखने और समझने के आदी हैं, उनके लिए इन बातों को समझ पाना मुश्किल है।हमारे देश का संविधान हमें अपने धार्मिक विश्वासों पर अमल करने और उसके प्रचार-प्रसार की पूरी स्वतंत्रता देता है।
-
अलवी किरदार को रोल मॉडल बनाना वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है: हुज्जतुल इस्लाम सय्यद…
हौज़ा / इंडियन स्टूडेंट्स यूनियन (क़ुम अल-मुक़द्देसा) के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद हैदर अब्बास ज़ैदी का कहना है कि इमाम अली (अ) को सिर्फ़ नारों, इज्तेमाअ और इमोशनल अटैचमेंट तक सीमित रखना मुस्लिम उम्माह की एक बड़ी दिमागी कमज़ोरी है। जब तक इमाम अली (अ) की सोच, ज़िंदगी और उनके असल उदाहरण को ज़िंदगी का हिस्सा नहीं बनाया जाता, तब तक समाज में इंसाफ़, ईमानदारी और सच्चाई जैसे बुनियादी इस्लामी उसूल कायम नहीं हो सकते।
-
हज़रत मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम की सीरत उम्मते मुस्लिमा के लिए मशअले राह हैं
हौज़ा / हजरत मोहम्मद तकी अलैहिस्सलाम की विलादत के मौके पर हिंदुस्तान के मशहूर खातिब डॉक्टर मौलाना सैयद शहावर हुसैन नक़वी से एक खुसूसी इंटरव्यू लिया गया जिसमें उन्होंने हज़रत मोहम्मद ताकि अ.स.सीरत पर रौशनी डाली।
-
संविधान का उद्देश्य नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें सीमित…
हौज़ा / किसी महिला के धार्मिक परिधान में सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप करना न केवल उसकी व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि यह राज्य के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के भी विरुद्ध है। यह कृत्य धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सम्मान—दोनों के खिलाफ है। संविधान का उद्देश्य नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें सीमित करना।
-
माहे रजब इबादत व मग़फिरत का बेहतरीन महीना हैं
हौज़ा / मौलाना तक़ी अब्बास रिज़वी ने माहे रजब के आगमन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एक इंटरव्यू में कहा माहे रजब अल्लाह से अच्छा संबंध बनाने का महीना है माहे रजब दुआ मुनाजात और मग़फिरत का महीना है,इस माहीने में हमारे जीवन की सभी परेशानियाँ दूर होंगी।
-
रजब का महीना सिर्फ़ नवाफ़िल का महीना नहीं है, बल्कि यह किरदार बनाने, सब्र, नेकी और…
हौज़ा/रजब उल मुरज्जब का महीना इस्लामी साल के उन मुबारक महीनों में से एक है जिसकी कुरान और सुन्नत में खास अहमियत और पवित्रता है। यह महीना जहाँ अल्लाह की रहमत और माफ़ी का नज़ारा दिखाता है, वहीं यह हमें पैगंबर (स) के मेराज पर जाने की बड़ी घटना की भी याद दिलाता है। इस मौके पर, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना रज़ा अब्बास खान हौज़तुल महदी हैदराबाद दक्कन के प्रिसिपल ने रजब महीने की फ़ज़ीलत, इसके रूहानी संदेश और इबादत तथा आमला पर खास बातचीत की।
-
इस्लामिक लॉ में एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन, भाग - 2
हौज़ा / अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (ए.एम.यू.) के शिया थियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. सय्यद हादी रज़ा तक़वी के साथ हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्टर ने उनकी पीएचडी की थीसिस "इस्लामिक लॉ में एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन" टापिक पर इंटरव्यू लिया।
-
क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्चर्स की जगह ले सकता है? / नॉलेज; रिसर्च के…
हौज़ा / कुरान के कल्चर और नॉलेज के रिसर्च इंस्टीट्यूट के हेड ने कहा: आज के ज़माने में, सिर्फ़ जानकारी इकट्ठा करना और किताबें (लेखक वाली नहीं) इकट्ठा करना साइंटिफिक वैलिडिटी नहीं रखता। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने से यह बात और साफ़ हो गई है कि डिवाइस डेटा इकट्ठा और ऑर्गनाइज़ कर सकते हैं, लेकिन थ्योरी बनाना, क्रिएशन और इनोवेशन सिर्फ़ एक जागरूक रिसर्चर की काबिलियत है।
-
डिजिटल दुनिया; बच्चों की ट्रेनिंग या बर्बादी? स्क्रीन से ज़्यादा माता-पिता की लापरवाही…
हौज़ा/ डिजिटल टेक्नोलॉजी के तेज़ी से फैलते असर ने बच्चों की ज़िंदगी, सोच और ट्रेनिंग के लिए एक नई चुनौती पेश की है। जाने-माने रिसर्चर हुज्जतुल इस्लाम वाल-मुस्लिमीन सैयद नजीबुल हसन ज़ैदी ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा है कि डिजिटल गेम्स अपने आप में कोई खतरा नहीं हैं, बल्कि असली समस्या उनका अनजाने में इस्तेमाल और माता-पिता की लापरवाही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर स्क्रीन का इस्तेमाल जागरूकता, प्लानिंग और प्यार से किया जाए, तो यह डिजिटल दुनिया बच्चों के दिमागी और नैतिक विकास का एक असरदार ज़रिया बन सकती है, नहीं तो यह उनकी बर्बादी का कारण भी बन सकती है।
-
गीता में हक़ तआला तक पहुंचने के रास्ते की जांच कुरान के आईने मे
हौज़ा / भगवद गीता हिंदू धर्म में एक खास स्थान रखती है। इसमें अठारह प्रवचन हैं, जो कृष्ण और अर्जुन के बीच बातचीत का कलेक्शन हैं। इस पुस्तक में रहस्यमय, बुद्धिमानीपूर्ण, नैतिक चर्चाएँ हैं।
-
हौज़ा न्यूज़ मुस्लिम युवाओं और आम लोगों को साइंटिफिक समझ और सही इंटेलेक्चुअल गाइडेंस…
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम सैयद ज़हीन अली काज़मी नजफी ने कहा: हौज़ा न्यूज़ एजेंसी का प्लेटफॉर्म अलग-अलग स्कॉलर्स और स्टूडेंट्स को अपनी साइंटिफिक और इंटेलेक्चुअल काबिलियत को दिखाने का एक खास मौका देता है। यहां, स्कॉलर्स अपनी रिसर्च काबिलियत, एनालिटिकल सोच और इंटेलेक्चुअल समझ को असरदार तरीके से पेश कर सकते हैं, और स्टूडेंट्स भी आगे आकर साइंटिफिक चर्चाओं, निबंध लिखने और सीरियस रिसर्च में हिस्सा ले सकते हैं। इस तरह, यह प्लेटफॉर्म न सिर्फ खबरों का सोर्स है, बल्कि एक इंटेलेक्चुअल और रिसर्च फोरम के तौर पर मुस्लिम उम्मा की साइंटिफिक ट्रेनिंग और एकता को भी बढ़ाता है।
-
फेमिनिज़्म के नारे खोखले हैं; सय्यदा कौनैन (स) की जीवनी ही मुक्ति का एकमात्र रास्ता…
हौज़ा/ पूरी दुनिया में फेमिनिज़्म के नाम पर महिलाओं के अधिकारों के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन असल में महिलाओं को असली इज़्ज़त और सम्मान नहीं मिला है। हौज़ा न्यूज़ एजेंसी को दिए एक खास इंटरव्यू में हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन सय्यद नजीबुल हसन ज़ैदी ने फेमिनिज़्म की असलियत, इसके उलटे-सीधेपन और इस दावे के मुकाबले हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की पूरी और प्रैक्टिकल भूमिका के बारे में विस्तार से बताया, और कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को नारे नहीं, बल्कि इज़्ज़त का एक पूरा सिस्टम दिया है।
-
हज़रत ज़हरा (स) की ज़ात मज़हरे शाने ख़ुदा हैं
हौज़ा / हज़रत ज़हेरा स.ल.की पवित्र हस्ती, ख़ुदा की शान का उज्ज्वल प्रतिबिंब है और आप सच्ची तरजुमान और आयात का स्रोत और ख़ज़ाना है। यह हस्ती इतनी मुक़द्दस और पाकीज़ा है कि जिनका ज़िक्र और जिनका वसीला हमारी दुआओं की क़बूलियत की ज़मानत है।
-
इस्लामिक लॉ में एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन
हौज़ा / अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (ए.एम.यू.) के शिया थियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. सय्यद हादी रज़ा तक़वी के साथ हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्टर ने उनकी पीएचडी की थीसिस "इस्लामिक लॉ में एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन" टापिक पर इंटरव्यू लिया।
-
हज़रत उम्मुल बनीन (स) ने विलायत की राह में बेमिसाल कुर्बानी दी
हौज़ा / नई मुंबई के इमाम जुमा हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद अली अब्बास उम्मीद आज़मी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी ने हज़रत उम्मुल बनीन (स) की बायोग्राफी और आज के ज़माने की ज़रूरतों पर डिटेल में इंटरव्यू लिया।
-
हज़रत उम्मूल बनीन (स) की सीरत नमूने अमल है
हौज़ा / हज़रत उम्मूल बनीन स.ल. की वफात के मौके पर हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मेराज ख़ान रन्नवी से एक खुसूसी इंटरव्यू हुआ उन्होंने हज़रत उम्मूल बनीम स.ल.की सीरत और किरदार के ऊपर रौशनी डाली।
-
इंटरव्यूः मुश्किलों और अन्याय के सामने भी ईमान और अख़लाक़ नहीं छोड़ना चाहिए
हौज़ा / क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, कुरआन और हदीस के रिसर्चर मौलाना सय्यद साजिद रज़वी से हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार ने अय्याम ए फ़ातिमा के हवाले से विशेष चर्चा की।
-
तबलीग़ मे नरमी, ईमानदारी और ज्ञान उपदेश के मुख्य स्तंभ हैं: मौलाना सैयद रिज़वान हैदर…
हौज़ा / हिंदुस्तान के मुमताज़ आलिम-ए-दीन और जामियतुल-बतूल हैदराबाद-दक्कन के निदेशक हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन डॉक्टर सय्यद रिज़वान हैदर रिज़वी ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के साथ ख़ुसूसीगुफ़्तगू में कहा कि तबलीग़ सिर्फ़ गुफ़्तार का नाम नहीं, बल्कि किरदार, ख़ुलूस और इल्म का हसीन इम्तिज़ाज है। उनका कहना था कि एक मुबल्लिग़ को ज़माने के तक़ाज़ों के साथ आगे बढ़ना चाहिए, मगर अपने पैग़ाम की अस्ल रूह को हमेशा महफ़ूज़ रखना चाहिए।