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  • इस्लाम और हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथों में आध्यात्मिक शिक्षा का तुलनात्मक अध्ययन

    इस्लाम और हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रंथों में आध्यात्मिक शिक्षा का तुलनात्मक अध्ययन

    क़ुम अल मुक़द्देसा मे रहने वाले भारतीय शिया धर्मगुरू, कुरआन और हदीस के रिसर्चर मौलाना सय्यद साजिद रज़वी इस्लाम और हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों में आध्यात्मिक शिक्षा का तुलनात्मक एवं संवादात्मक अध्ययन कर रहे हैं। उनके शोध में विशेष रूप से हदीसों को केंद्र में रखते हुए दोनों धार्मिक परंपराओं में आत्म-संशोधन, नैतिकता, आध्यात्मिक विकास, ईश्वर से संबंध और जीवन के अंतिम उद्देश्य जैसे विषयों का अध्ययन किया जा रहा है। हौज़ा न्यूज़ के प्रतिनिधि ने मौलाना से उनके शोध के उद्देश्य, पद्धति, नवीनता और सामाजिक महत्ता सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत बातचीत की।

  • टेकनालॉजी ने मरजइयत और मोमिनों के बीच संपर्क को और आसान बना दिया है: मौलाना सय्यद ज़ामिन अब्बास जाफ़री

    टेकनालॉजी ने मरजइयत और मोमिनों के बीच संपर्क को और आसान बना दिया है: मौलाना सय्यद…

    हज़रत आयतुल्लाह अज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी के केंद्रीय कार्यालय से जुड़े मौलाना सैयद ज़ामिन अब्बास जाफरी नजफ़ी ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि अरबीईन के अवसर पर ज़ायरीन की सेवा के साथ-साथ मरजइयत और मोमिनों के बीच संपर्क को आधुनिक साधनों के माध्यम से और आसान बनाया गया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को धर्म से जोड़ने के लिए तकनीक का सकारात्मक उपयोग और विद्वानों से मार्गदर्शन लेना जरूरी है।

  • फिरकापरस्ती, उम्मत ए मुस्लिमा के लिए एक बड़ी चुनौती

    फिरकापरस्ती, उम्मत ए मुस्लिमा के लिए एक बड़ी चुनौती

    हौज़ा / हफ्त ए वहदत के मौके पर हिंदुस्तान के मशहूर खतीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मेराज हैदर खान आज़मी से एक इंटरव्यू हुआ इस मौके पर उन्होंने कहां, इस ज़माने में फिरकापरस्ती, उम्मत ए मुस्लिमा के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।

  • एकता सप्ताह;इंसानियत की निजात का सप्ताह

    एकता सप्ताह;इंसानियत की निजात का सप्ताह

    हौज़ा / हज़रत पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम दुनिया के वो अकेले नबी हैं जिन्हें कुरआन पाक में "रहमतुल-लिल-आलमीन"सारी दुनिया के लिए रहमत कहा गया है। यह नाम सिर्फ एक इज़्ज़त या ख़िताब नहीं है, बल्कि इसका मतलब यह है कि आपको पूरी दुनिया के लिए अल्लाह ने भेजा है।

  • हक़ीक़ी मुंतज़िर वही है जो अत्याचार और अन्याय के खिलाफ व्यावहारिक भूमिका निभाए: मौलाना अबुल हसन नकवी

    हक़ीक़ी मुंतज़िर वही है जो अत्याचार और अन्याय के खिलाफ व्यावहारिक भूमिका निभाए: मौलाना…

    इमाम-ए-ज़माना अलैहिस्सलाम का वास्तविक इंतजार केवल जुबानी दावा या उनके ज़हूर की इच्छा का नाम नहीं है, बल्कि अपने समाज में अत्याचार, अन्याय, झूठ और नैतिक बुराइयों के मुकाबले सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाने की मांग करता है। वास्तविक इंतजार करने वाला अपने चरित्र और कार्यों के माध्यम से खुद को इमाम महदी अलैहिस्सलाम के विश्वव्यापी न्याय और इंसाफ के मिशन के लिए तैयार करता है।

  • इमाम हसन अस्करी अ.स. की इस्लाह-ए-मुआशरा का पैग़ाम

    इमाम हसन अस्करी अ.स. की इस्लाह-ए-मुआशरा का पैग़ाम

    हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद अबुल हसन नक़वी ने हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ.स.) की शहादत के अवसर पर कहा कि आज इमाम हसन अस्करी अ.स. के पैग़ाम को तीन बुनियादी शब्दों तक़्वा, अख़्लाक़ और सामाजिक ज़िम्मेदारी में समझा जा सकता है। हमें अपने ईमान को अच्छे किरदार और नेक अमल में ढालना होगा। केवल धार्मिक दावे पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि हमारे व्यवहार और आचरण से भी दीन की खूबसूरती और उसकी शिक्षाएं ज़ाहिर होनी चाहिए।

  • इमाम हसन अस्करी (अ) की 250 साल की साजिश के अंत की रणनीति

    इमाम हसन अस्करी (अ) की 250 साल की साजिश के अंत की रणनीति

    इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम के दौर-ए-इमामत की शानदार उपलब्धियों, राजनीतिक परिस्थितियों के सामने आपके स्पष्ट और गंभीर रुख तथा अहले बैत अलैहिमुस्सलाम के दुश्मनों की बेहद खतरनाक और जटिल साजिशों के मुकाबले आपकी रणनीति का व्यापक विश्लेषण एक व्याख्यात्मक लेख में प्रस्तुत किया जा रहा है।

  • अरबईन आत्मा की ऊँचाई, उम्मत की जागृति और अत्याचार के विरुद्ध हुसैनी चरित्र के नवीनीकरण की यात्रा है: मौलाना कल्ब रशीद रिज़वी

    अरबईन आत्मा की ऊँचाई, उम्मत की जागृति और अत्याचार के विरुद्ध हुसैनी चरित्र के नवीनीकरण…

    भारत के प्रसिद्ध राजनीतिक और धार्मिक नेता हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना डॉक्टर सैय्यद कल्ब रशीद रिज़वी ने अरबईन-ए-हुसैनी को केवल नजफ़ से कर्बला तक की दूरी तय करने वाली यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास, आत्म-सुधार और हुसैनी विचारों के पुनर्जीवन की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि ज़ायरीन का वास्तविक उद्देश्य केवल कर्बला पहुँचना नहीं होना चाहिए, बल्कि इमाम हुसैन (अ.) के सत्य और न्याय के संदेश को अपने व्यावहारिक जीवन में लागू करना और समाज में प्रेम, एकता तथा मानवता को बढ़ावा देना होना चाहिए।

  • अरबईन-ए-हुसैनी शिया पहचान और उम्मते मुस्लिमा की जागृति का वैश्विक प्रतीक है: मौलाना सैय्यद तक़ी रज़ा

    अरबईन-ए-हुसैनी शिया पहचान और उम्मते मुस्लिमा की जागृति का वैश्विक प्रतीक है: मौलाना…

    मजलिस-ए-उलेमा-ए-दक्षिण भारत के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैय्यद तक़ी रज़ा आबिदी (तक़ी आगा) ने अरबईन-ए-हुसैनी के अवसर पर नजफ़ अशरफ़ से कर्बला-ए-मुअल्ला की ओर पैदल यात्रा के दौरान हौज़ा न्यूज़ से विशेष बातचीत में कहा कि अरबईन, हज़रत इमाम हुसैन (अ.) की सत्यता, मक्तबे अहले बैत (अ.) के वैश्विक जीवन और इस्लाम की स्थिरता का जीवंत चमत्कार है। इसने शिया पहचान को विश्व स्तर पर मजबूत किया है और दुनिया को सत्य, न्याय और त्याग का अमर संदेश दिया है।

  • अरबईन-ए-हुसैनी इंसान साज़ी, वैश्विक जागरूकता और अहलेबैत (अ.) की सभ्यता का जीवंत प्रतीक है: मौलाना सय्यद फ़ैज़ान हैदर जवादी

    अरबईन-ए-हुसैनी इंसान साज़ी, वैश्विक जागरूकता और अहलेबैत (अ.) की सभ्यता का जीवंत प्रतीक…

    प्रसिद्ध धार्मिक कार्यकर्ता और प्रचारक मौलाना सय्यद फ़ैज़ान हैदर जवादी, इन दिनों अरबीन-ए-हुसैनी के अवसर पर नजफ़ अशरफ़ से कर्बला मौअल्ला तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने नजफ़ से यात्रा के दौरान हौज़ा न्यूज़ के प्रतिनिधि से विशेष बातचीत में कहा कि अरबर्ईन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक और सभ्यतागत आंदोलन है, जो इंसान को अल्लाह, अहलेबैत (अ), समाज और समूची मानवता के साथ अपने संबंध को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करता है।

  • ज़ुहूर में शीघ्रता के लिए इंतज़ार करने वालों के सामाजिक पक्ष

    ज़ुहूर में शीघ्रता के लिए इंतज़ार करने वालों के सामाजिक पक्ष

    महदवियत के विशेषज्ञ और शोधकर्ता ने इमाम ज़माना (अ) के इंतज़ार करने वालों के उन सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला जो ज़ुहूर की तैयारी करने वाले समाज से संबंधित हैं।

  • शहीद रहबर ने अपने पवित्र जीवन और अपनी शहादत के माध्यम से पूरी मुस्लिम उम्मत के सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि की

    शहीद रहबर ने अपने पवित्र जीवन और अपनी शहादत के माध्यम से पूरी मुस्लिम उम्मत के सम्मान…

    हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद शहनशाह हुसैन नक़वी ने कहा: शहीद रहबर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार और नमाज़-ए-जनाज़ा में भाग लेना मेरे लिए एक ऐतिहासिक और कभी न भूलने वाला अनुभव था, जहाँ ईरानी जनता की एकता, वफ़ादारी और इस्लामी क्रांति के प्रति लगाव का अद्भुत दृश्य पूरी दुनिया ने देखा।

  • शहीद सुप्रीम लीडर की अंतिम विदाई वैश्विक जागरूकता, प्रतिरोध की भावना और ईरान-भारत के सभ्यतागत संबंधों के पुनर्जीवन का ऐतिहासिक प्रतीक थी: हुज्जतुल इस्लाम सय्यद नजीबुल हसन ज़ैदी

    शहीद सुप्रीम लीडर की अंतिम विदाई वैश्विक जागरूकता, प्रतिरोध की भावना और ईरान-भारत…

    भारत के प्रसिद्ध शहर मुंबई की मस्जिद-ए-ईरानियान के इमाम-ए-जमाअत, प्रसिद्ध वक्ता और विचारक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन सय्यद नजीबुल हसन ज़ैदी ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी को दिए गए विशेष साक्षात्कार में कहा कि शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई की विशाल अंतिम यात्रा केवल एक जनाज़ा नहीं थी, बल्कि जनता की निष्ठा, प्रतिरोध की विचारधारा और ईरान व भारत के गहरे सभ्यतागत एवं आध्यात्मिक संबंधों का ऐतिहासिक प्रतीक थी। उन्होंने कहा कि इस विशाल जनसमूह ने यह सिद्ध कर दिया कि महान व्यक्तित्व सीमाओं से ऊपर उठकर पूरी मानवता की साझा वैचारिक पूंजी बन जाते हैं।

  • वर्तमान समाज के लिए हज़रत सय्यद उश शोहदा (अ) के आंदोलन का संदेश और सबक

    वर्तमान समाज के लिए हज़रत सय्यद उश शोहदा (अ) के आंदोलन का संदेश और सबक

    हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मुन्तज़री मुक़द्दम ने कहा: हज़रत सय्यद उश शोहदा इमाम हुसैन (अ) के व्यक्तित्व को आशूरा से अलग करके नहीं समझा जा सकता। आशूरा केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक संस्कृति-निर्माता और विचार-निर्माता तत्व है, जो व्यक्तियों और समाजों को सुस्ती और संवेदनहीनता से निकालकर उत्साह, उद्देश्य, स्वतंत्रता और जीवंतता की ओर ले जा सकता है।

  • क़ुरआनी गेम "कलमा" का लोकार्पण / क़ुरआनी मफ़हूमो को सीखना हुआ आसान, आकर्षक और उपयोगी

    क़ुरआनी गेम "कलमा" का लोकार्पण / क़ुरआनी मफ़हूमो को सीखना हुआ आसान, आकर्षक और उपयोगी

    मदरसा-ए-इल्मिया मदीनतुल इल्म, क़ुम के छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के एक समूह ने क़ुरआनी गेम "कलमा" को डिज़ाइन और विकसित किया है।

  • बराअत का दायरा अब बढ़कर साम्राज्यवाद के समर्थकों तक पहुँचा है

    बराअत का दायरा अब बढ़कर साम्राज्यवाद के समर्थकों तक पहुँचा है

    हज एवं ज़ियारत अनुसंधान संस्थान के प्रमुख ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हज में इबादत और राजनीति का मेल केवल इस्लामी गणराज्य ईरान की सोच नहीं है, बल्कि इसका आधार स्वयं इस्लाम में मौजूद है। उन्होंने कहा कि हज एक “पूर्ण जीवन-कार्यक्रम” है, जिसका दृष्टिकोण सभ्यतागत है, और यह बिना शत्रु-परिचय और “बराअत” के तत्व के पूरा नहीं हो सकता।

  • अगर लोग "गदीर के दिन" की असली फजीलत जानते, तो फ़रिश्ते उनसे हर दिन दस बार हाथ मिलाते

    अगर लोग "गदीर के दिन" की असली फजीलत जानते, तो फ़रिश्ते उनसे हर दिन दस बार हाथ मिलाते

    ग़दीर का संदेश आज के मुस्लिम समाज के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह "सच्ची लीडरशिप की पहचान", "सच्ची लीडरशिप को स्वीकार करना" और "सच्चाई से जुड़ाव" पर ज़ोर देता है। ग़दीर अमीर अल-मुमिनीन हज़रत अली (अ) और उनकी इस्लामी लीडरशिप की खूबियों और अहमियत पर ज़ोर देता है।

  • ग़दीर का संदेश मुस्लिम उम्माह के धर्म की एकता, मार्गदर्शन और पूर्णता की गारंटी है: मौलाना सैयद मुहम्मद असलम रिज़वी

    ग़दीर का संदेश मुस्लिम उम्माह के धर्म की एकता, मार्गदर्शन और पूर्णता की गारंटी है:…

    महाराष्ट्र शिया उलेमा बोर्ड के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद मुहम्मद असलम रिज़वी ने कहा है कि ईद-ए-गदीर इस्लामी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक दिन है, क्योंकि इस दिन अल्लाह तआला ने धर्म को पूरा किया और सभी पर अपनी कृपा बरसाई। ग़दीर का संदेश सिर्फ़ शियाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी मुस्लिम उम्माह के लिए एकता, संरक्षकता, नेतृत्व और मार्गदर्शन का एक आम संदेश है, जिसे मुसलमानों के बीच नज़दीकी और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सही तरीके से पेश किया जा सकता है।

  • शहीद नेता की नज़र में औरत और परिवार / केवल घरेलू भूमिका तक सीमित या पश्चिमी विचारधारा का प्रतिबिंब!!

    शहीद नेता की नज़र में औरत और परिवार / केवल घरेलू भूमिका तक सीमित या पश्चिमी विचारधारा…

    अंतर्राष्ट्रीय अल्लामह अस्करी विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक समिति की सदस्य और हौज़ा ए इल्मिया ख्वाहरान की शिक्षिका डॉ. रज़िया ज़ारेई ने शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब के "औरत के तीसरे मॉडल" के सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा: यह मॉडल न तो औरत को केवल घर तक सीमित देखना चाहता है और न ही उसे परिवार से दूर करना चाहता है, बल्कि परिवार और समाज में उसकी एक साथ पहचान पर जोर देता है, जहाँ हिजाब, पवित्रता, योग्यता, क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों का संरक्षण भी शामिल हो।

  • ईरानी सरकार ने युद्ध मे भी जनता को किसी चीज़ की कोई कमी नही होने दी

    ईरानी सरकार ने युद्ध मे भी जनता को किसी चीज़ की कोई कमी नही होने दी

    जब जंग के हालात होते है तो उसमे आर्थिक चुनौतिया सामने आती है। महंगाई और बेरोज़गारी भी बढ़ती है। लेकिन यहा की सरकार का हमेशा से यह रहा है कि जनता की ज़रूरीयात पर पूरी नज़र होती है और काफ़ी मदद भी करती है और अबी भी किसी भी चीज़ की किसी भी प्रकार से कोई कमी नही होने दी है