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दिन की हदीस
ख़ुदा के नज़दीक सबसे पसंदीदा अमल
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में नमाज़ की फ़ज़ीलत और उसे वक़्त पर अदा करने की अहमियत की ओर इशारा फ़रमाया है।
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हक़ के बचाव में डट जाना
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में बातिल के मुक़ाबले में डट जाने और स्थिरता पर ज़ोर दिया है।
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दिन की हदीसः
जिन लोगों का अपना दामन ऐबों से भरा होता है, वही दूसरों की कमियों को फैलाते फिरते हैं
अमीरुल मोमिनीन हज़रत इमाम अली (अ) ने एक रिवायत में उन लोगों के बारे में बताया है जो दूसरों के ऐबों और कमियों को फैलाते हैं तथा इसके पीछे छिपे कारण को स्पष्ट किया है।
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दिन की हदीसः
बात को आगे बढ़ाने से पहले उस पर विचार करें
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में इस बात पर ज़ोर दिया है कि किसी बात को आगे सुनाने से पहले उसे गहराई से समझना और उस पर विचार करना चाहिए।
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रोज़ी भी इंसान को तलाश करती है
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने अपने पुत्र के नाम लिखे एक पत्र में रोज़ी की वास्तविकता तथा उसे प्राप्त करने के प्रयास में मन की शांति और अल्लाह पर भरोसा रखने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
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दिन की हदीस:
हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत से मोहब्बत
हौज़ा / हज़रत इमाम अली अ.स.ने एक रिवायत में अपनी शहादत के बारे में,शहादत से मोहब्बत का इजहार किया है
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दिन की हदीसः
सम्मान, शत्रु पर विजय प्राप्त करने में है
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में बताया है कि वास्तविक सम्मान और महानता शत्रु पर विजय प्राप्त करने में है।
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दिन की हदीस:
दुश्मन से बेखबर रहने का अंजाम
हौज़ा / हज़रत इमाम अली अ.स. ने एक रिवायत में दुश्मन से बेखबर रहने के अंजाम की ओर इशारा किया है।
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जंग के मैदान मे अल्लाह का ज़िक्र
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में योद्धाओं को जंग के मैदान में अल्लाह का अधिक ज़िक्र करने और व्यर्थ की बातों से बचने की सलाह दी है।
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दिन की हदीसः
इस्लाम: प्रेम और मानवता का धर्म, यहाँ तक कि युद्ध के मैदान में भी
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक आदेश-पत्र में युद्ध की स्थिति में भी मानवीय नैतिकता और अधिकारों का पालन करने के सिद्धांत बताए हैं।
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दिन की हदीस
इमाम ज़माना (अ) की ग़ुरबत
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली अलैहिस्सलाम ने एक रिवायत में हज़रत वली-ए-अस्र (अ) की ग़ुरबत और तन्हाई का उल्लेख किया है।
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जनाज़े में शामिल होने वालों का अज्र और सवाब
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में मोमिन के जनाज़े में शामिल होने वालों के लिए इलाही इनाम को बयान किया है।
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सम्मानपूर्ण मृत्यु, अपमानजनक जीवन से बेहतर है
इमाम हुसैन ने एक हदीस में बताया है कि सम्मान और स्वाभिमान को अपमानपूर्ण जीवन पर प्राथमिकता देनी चाहिए।
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सर्वोच्च भलाई और नेकी
पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में शहादत के महान महत्व का उल्लेख किया है।
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दिन की हदीसः
शहीदों और नबियों के साथ रहने की आरज़ू
अमीरुल मोमेनीन (अ) ने अपने ख़ुत्बे के एक हिस्से में अल्लाह से आख़रत में सबसे ज़्यादा खुशी मांगी है।
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दिन की हदीसः
शहादत, अहल-ए-बैत (अ) के लिए सम्मान और गौरव
इमाम सज्जाद (अ) ने एक रिवायत में शहादत को अहल-ए-बैत (अ) के लिए सम्मान और गौरव बताया है।
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दिन की हदीसः
इमाम हुसैन (अ) के कलाम मे मुनाफिक़ की पहचान
इमाम हुसैन (अ) ने एक रिवायत में बताया है कि पैगंबर मुहम्मद (स) के समय में मुनाफिकों की पहचान क्या थी।
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दिन की हदीसः
अमीरुल मोमेनीन (अ) के कलाम में शहादत का शौक़
अमीरुल मोमेनीन इमाम अली इब्न अबी तालिब (अ) ने एक रिवायत में शहादत के उच्च स्थान और उसके प्रति अपनी गहरी अभिलाषा का वर्णन किया है।
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दिन की हदीसः
अहलेबैत (अ) के मक्तब को जीवित रखना
इमाम रज़ा (अ) एक रिवायत में अहलेबैत (अ) के ज्ञान को सीखने और उसे फैलाने की अहमियत पर जोर देते हैं।
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दिन की हदीसः
हक़ीक़ी मोमिन की निशानियाँ
पैग़म्बर अकरम (स) ने एक रिवायत में सच्चे और हक़ीक़ी मोमिन की दो अहम विशेषताओं को बयान किया है।
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दूसरों की संपत्ति पर नज़र न रखने का प्रभाव
इमाम सज्जाद (अ) ने एक रिवायत में दूसरों के धन और संपत्ति की लालसा छोड़ने को अच्छाइयों और भलाई का मूल स्रोत बताया है।
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गुनाह छोड़ने में सच्ची कोशिश
पैग़म्बर-ए-अकरम (स) ने एक रिवायत में सबसे अधिक मेहनत करने वाला इंसान उसको बताया है जो गुनाह से दूर रहता है।
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दिन की हदीसः
सच्चे शिया की पहचान
इमाम हुसैन (अ) ने एक रिवायत में अहले-बैत (अ) के सच्चे शियो के गुणों का वर्णन किया है।
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हज़रत ज़ैनब (स) के दुख पर आँसू बहाने का अज्र
इस्लाम के पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (स) ने एक हदीस में हज़रत ज़ैनब (स) की विपत्तियों पर आँसू बहाने के अज्र का उल्लेख किया है।
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इमाम हुसैन (अ) के अज़ादारों का क़यामत के दिन दर्जा
इमाम रज़ा (अ) ने एक हदीस में आशूरा के दिन अज़ादारी करने वालों के क़यामत के दिन के उच्च स्थान का वर्णन किया है।
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दिन की हदीसः
इमाम हुसैन (अ) की जुदाई में ख़ून के आँसू
इमाम ज़माना, हज़रत महदी (अ) ने ज़ियारत-ए-नाहिया में अपने दादा हज़रत अबा अब्दिल्लाहिल हुसैन (अ) के लिए अपने गहरे दुःख, ग़म और अपार मोहब्बत को व्यक्त करने वाले शब्द कहे हैं।
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इमाम हुसैन (अ) से प्रेम, इंसान के लिए इलाही ख़ैर की निशानी है
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में हज़रत अबा अब्दिल्लाह अल-हुसैन (अ) से मोहब्बत और उनकी ज़ियारत की चाहत को अल्लाह की ओर से मिलने वाली भलाई और बरकत की निशानी बताया है।
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दिन की हदीसः
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की ज़ायरीन-ए-इमाम हुसैन (अ) के हक़ में दुआ
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) के उस विशेष करम का उल्लेख किया है जो वह इमाम हुसैन (अ) के ज़ायरीन पर करती हैं।