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ईरान ओमान समझौते का होर्मुज़ खोलने से कोई संबंध नहीं
हौज़ा / ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने कहा है कि, सल्तनत-ए-ओमान के साथ हुआ समझौता किसी भी तरह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का अर्थ नहीं रखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए ईरान की शर्त यह है कि अमेरिका इस्लामाबाद समझौता-ज्ञापन में किए गए अपने दायित्वों पर वापस लौटे।
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गौहाटी हाई कोर्ट ने तलाक-ए-हसन को वैध तलाक का रूप माना
हौज़ा / गौहाटी हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि तलाक-ए-हसन भारत में तलाक का एक वैध रूप है और इस पर प्रतिबंध नहीं है। न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने यह फैसला मुस्लिम तलाक के पंजीकरण से जुड़े एक मामले में सुनाया।
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संतुलित पीढ़ी के निर्माण के लिए धार्मिक शिक्षा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना जरूरी
अंजुमन-ए-शरई शियान जम्मू-कश्मीर के तत्वावधान में बारामूला के याल कनज़र स्थित इमामबाड़ा हज़रत ज़हरा (स) में एक शैक्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें हौज़ा-ए-इल्मिया और दर्जनों धार्मिक मकतबों में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र-छात्राओं के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, धार्मिक विद्वानों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
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माहे रबीउस् सानी की अहम मुनासेबतें
हौज़ा / माहे रबीउस् सानी के महीने में बहुत सारी मुनासिबतें है जो आपकी खिदमत में पेश की जा रही है
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जम्मू-कश्मीर में सय्यद हसन मंतकी अकादमी के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महफ़िल-ए-मीलाद…
जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय महफ़िल-ए-मीलाद का आयोजन किया गया। इसमें राज्य के प्रतिनिधियों, धार्मिक और शैक्षिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों के अलावा बांग्लादेश के एक प्रतिष्ठित धर्मगुरु और प्रसिद्ध शिक्षाविद ने भी भाग लिया।
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मौलाना यासूब अब्बास की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात, भारत-ईरान संबंधों को और मजबूत…
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मिर्ज़ा यासूब अब्बास ने नई दिल्ली में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान से मुलाकात की और भारत तथा ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
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भारतीय मुसलमानों की शैक्षिक और सांस्कृतिक सेवाओं को प्रमाणिक ऐतिहासिक साक्ष्यों के…
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में मुहम्मद रज़ीउल इस्लाम नदवी ने कहा कि भारतीय मुसलमानों की सदियों से चली आ रही शैक्षिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, सांस्कृतिक और शिक्षण संबंधी सेवाओं को प्रमाणिक ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अतीत को बदलने या इतिहास को नए सिरे से लिखने के मौजूदा प्रयासों में भारतीय मुसलमानों की सेवाओं को नजरअंदाज करने, सीमित करने और कभी-कभी उन्हें पूरी तरह हटा देने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, जो ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करने के समान है।
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मीरवाइज, आगा हसन और मौलवी इमरान अंसारी की अब्बास अराक्ची से मुलाकात
मीरवाइज, आगा हसन और मौलवी इमरान अंसारी ने नई दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची से मुलाकात की। इस दौरान ईरानी जनता के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए संयम, बातचीत और मुस्लिम उम्मत की एकता पर जोर दिया गया।
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साइंस और टैक्नालॉजी में भारतीय मुसलमानों की भूमिका अविस्मरणीय: प्रोफेसर अख्तरुल वासे
भारत में मुसलमानों की सेवाओं का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। मुगलों से पहले, मुगल काल में, ब्रिटिश शासन के दौर में और देश की आज़ादी के बाद भी हर युग में उन्होंने विज्ञान, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। ये विचार पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे, जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान के पूर्व कुलपति ने राष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।
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ईरानी राष्ट्रपति के स्वागत में दिखी भारत-ईरान की सदियों पुरानी सांस्कृतिक दोस्ती
एक सिख धर्मगुरु ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते आधुनिक कूटनीति से कहीं अधिक पुराने हैं। उन्होंने प्रसिद्ध कहावत “हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या” का हवाला देते हुए भारत में फ़ारसी भाषा और ईरानी संस्कृति के ऐतिहासिक प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया।
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भारत-ईरान दोस्ती को मजबूत करने का संकल्प: श्री स्वामी सारंग
श्री स्वामी सारंग ने कहा कि भारत और ईरान केवल दो राष्ट्र नहीं, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, जिनके संबंध इतिहास, संस्कृति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना की गहराइयों तक जुड़े हुए हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों की साझा ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का उपयोग स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, शिक्षा, संस्कृति और मानव कल्याण जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए किया जा सकता है।
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ईरान भारत का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार: आचार्य बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण ने भारत और ईरान की साझा ज्ञान-परंपरा तथा दोनों सभ्यताओं के बीच ऐतिहासिक संपर्कों का उल्लेख करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, संस्कृति, ज्ञान और मानव कल्याण जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उनके अनुसार, दोनों देशों की प्राचीन परंपराओं और ज्ञान-संपदा का इस्तेमाल व्यापक मानवीय हितों के लिए किया जा सकता है।
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सिर्फ़ सीरत बयान करना नहीं, उसे अपनी ज़िंदगी में उतारना ज़रूरी हैं।मौलाना सय्यद मासूम…
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद मासूम रज़ा कैफ़ी ने सूरह अल-अहज़ाब की आयत 21 का हवाला देते हुए कहा कि रसूल ए अकरम (स.ल.) की सीरत केवल बयान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में लागू करना ज़रूरी है।
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इज़राईली आक्रामकता के खिलाफ़ प्रतिरोध ज़रूरी, अरब और इस्लामी देशों के मतभेद खत्म…
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सदरुद्दीन क़बानची ने इराक में सरकार के गठन को पूरा करने, बाहरी दबाव से बचने और क्षेत्र में इज़राइली आक्रामकता के खिलाफ़ मज़बूत रुख अपनाने पर ज़ोर दिया
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क़याम-ए-तव्वाबीन; कर्बला के बाद ज़मीर की बेदारी और इंतिक़ाम-ए-ख़ून-ए-हुसैन की पहली…
हौज़ा / दश्त-ए-नैनवा में नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, अपने वफ़ादार असहाब व अनसार समेत शहीद किये जा चुके थे। ख़ैमे जलाये जा चुके थे, अहल-ए-हरम को असीर बना लिया गया था और यज़ीदी इक़्तेदार ये समझ रहा था कि उसने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को शहीद करके हुसैनियत की आवाज़ को भी ख़ामोश कर दिया है।मगर तारीख़ ने बहुत जल्द साबित कर दिया कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को क़त्ल किया जा सकता है, हुसैनियत को नहीं; इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के जिस्म-ए-अतहर को ख़ाक में दफ़्न किया जा सकता है, मगर उनके पैग़ाम को नहीं।
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नमाज़ सभी समस्याओं का हल हैंः मौलाना सय्यद वसी अहमद ज़ैदी
हौज़ा / इमाम ए जुमआ केराकत चौरा जौनपुर; मौलाना हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद वसी अहमद ज़ैदी ने नमाज़ की अहमियत बयान करते हुए मुसलमानों से इबादत की पाबंदी और आपसी एकता कायम रखने की अपील की उन्होने कहा कि नमाज़ इंसान को अल्लाह से जोड़ने वाली सबसे अहम इबादतों में से है और नमाज सभी समस्याओं का हाल हैं।
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माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार इस्लामी शिक्षाओं की बुनियादी मांग है: मौलाना सय्यद…
गुजरात के कानोदर स्थित इमाम अली मस्जिद में नमाज़े जुमा के खुतबे को संबोधित करते हुए मौलाना सय्यद यासीन हुसैन आबिदी ने माता-पिता की महानता, उनके अधिकारों और बच्चों की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुरआन मजीद में अल्लाह की इबादत और तौहीद के आदेश के साथ माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इससे इस्लामी शिक्षाओं में माता-पिता के ऊंचे स्थान का पता चलता है।
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राष्ट्रपति पिज़िश्कियान: अमेरिका की धमकियों के आगे सिर नहीं झुकाएंगे
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पिज़िश्कियान ने कहा है कि सभी धर्मों की बुनियाद न्याय और अत्याचार तथा अन्याय के खिलाफ संघर्ष पर आधारित है। ईरानी राष्ट्र किसी भी तरह की धमकी, दबाव, जबरदस्ती और ताकत के सामने सिर नहीं झुकाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में अपने फैसले खुद करे। इसी कारण इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से वह ईरान में मतभेद और फूट पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
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आख़ेरत पर यक़ीन और मेहमान नवाज़ी से समाज की इस्लामी तरबीयत
मौलाना तनवीरुल हसन, इमाम-ए-जुमा गाज़ीपुर ने जुमे के ख़ुत्बे में सूरह-ए-अहज़ाब की आयत 21 का हवाला देते हुए कहा कि परवरदिगार-ए-आलम ने रसूल-ए-अकरम (स) की ज़िंदगी को तमाम इंसानों के लिए बेहतरीन नमूना-ए-अमल क़रार दिया है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अल्लाह की ज़ात पर ईमान रखता है, आख़िरत पर यक़ीन करता है और कसरत से ज़िक्र-ए-ख़ुदा करता है, उसके लिए रसूल (स) की सीरत बेहतरीन नमूना-ए-अमल है।