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  • इंसान और अल्लाह के बीच सबसे बड़ा पर्दा

    इंसान और अल्लाह के बीच सबसे बड़ा पर्दा

    इंसान की आत्मिक संरचना ऐसी है कि यदि वह अल्लाह के दरबार में गिड़गिड़ाता और विनम्रता प्रकट नहीं करता, तो उसमें अहंकार और सरकशी जैसी आत्मिक बुराइयां पैदा हो जाती हैं। गिड़गिड़ाना वास्तव में इंसान के अपने व्यक्तित्व के अहंकार को छोड़ देने से पैदा होता है और यही अवस्था अल्लाह के सामने उसकी वास्तविक स्थिति को अधिक स्पष्ट करती है।

  • आज के समाज को पढ़ने से अधिक، धर्म को समझने की आवश्यकता है

    आज के समाज को पढ़ने से अधिक، धर्म को समझने की आवश्यकता है

    हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन कमाली ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक ज्ञान को केवल धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने और जानने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के समाज को केवल पढ़ना-लिखना जानने से अधिक धर्म को समझने की जरूरत है। ऐसा ज्ञान, जो कुरआन और हदीस, बुद्धि और हृदय को आपस में जोड़कर इंसान को धर्म के बाहरी रूप को जानने से लेकर उसकी वास्तविक आत्मा, ईश्वर की पहचान और नेक अमल पर आधारित जीवन तक पहुंचाए।

  • हौज़ा इल्मिया में इल्म का सफर अमल और इल्म के प्रसार पर समाप्त होना चाहिए

    हौज़ा इल्मिया में इल्म का सफर अमल और इल्म के प्रसार पर समाप्त होना चाहिए

    मशहद मुकद्दस में मदरसा इल्मिया जाफरिया व फिक्ही शम्सुश्शुमूस (अ.) में फिक्ह और उसूल के विद्वानों के समूह की दसवीं बैठक इस संस्थान के शिक्षकों और शैक्षणिक समिति के सदस्यों की मौजूदगी में आयोजित हुई।

  • आज हमें शेख अंसारी जैसे ऐसे विद्वानों की आवश्यकता है, जो वर्तमान दौर की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करें

    आज हमें शेख अंसारी जैसे ऐसे विद्वानों की आवश्यकता है, जो वर्तमान दौर की समस्याओं…

    क़ुम के हौज़ा इल्मिया के शिक्षक संघ के प्रमुख आयतुल्लाह सैयद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने वैज्ञानिक और शैक्षणिक प्रयासों को रक्षात्मक प्रयासों के साथ जारी रखने पर जोर देते हुए कहा है कि आज समाज को ऐसे विद्वानों और विशेषज्ञों की आवश्यकता है, जो शेख अंसारी की तरह गहरी विद्वतापूर्ण समझ और इज्तिहादी तरीके से वर्तमान दौर की नई समस्याओं का अध्ययन करके उनका समाधान प्रस्तुत कर सकें।

  • हौज़ा इल्मिया की सभी गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से भी लिया जाएगा लाभ

    हौज़ा इल्मिया की सभी गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना, कृत्रिम…

    हौज़ा इल्मिया क़ुम ने अपनी शैक्षणिक, शोध, प्रचार-प्रसार और अन्य गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिए कई नई योजनाएँ तैयार की हैं। इनमें आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक उपयोग, क़ुम और नजफ़ के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करना, विदेशी शिक्षकों और विशेषज्ञों के लिए अल्पकालिक पाठ्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय धार्मिक सेवाओं की व्यवस्था शामिल है।

  • भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | ताजुल उलेमा मौलाना अली मुहम्मद नसीराबादी

    भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | ताजुल उलेमा…

    पेशकश: दनिश नामा-ए-इस्लाम, इन्टरनेशनल नूर माइक्रो फ़िल्म सेंटर दिल्ली

  • क़ुरआन की नज़र में इंसान की प्रमुख विशेषता ईसार है: हुज्जतुल इस्लाम अबुलक़ासिम

    क़ुरआन की नज़र में इंसान की प्रमुख विशेषता ईसार है: हुज्जतुल इस्लाम अबुलक़ासिम

    हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लेमीन मुहम्मद हाज अबुलक़ासिम दूलाबी ने हज़रत मासूमा क़ुम (स) के पवित्र हरम में कहा कि इबादत, अल्लाह से लगातार संबंध और त्याग, क़ुरआन की नज़र में इंसान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। अहले-बैत (अ) ने अपने जीवन के तरीके के माध्यम से इंसानियत को सम्मान और गरिमा प्रदान की।

  • शोध के बिना बात न करें, न किसी बात को रद्द या स्वीकार करे

    शोध के बिना बात न करें, न किसी बात को रद्द या स्वीकार करे

    समाज का सांस्कृतिक विकास और बौद्धिक प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि उसके विद्वान और बुद्धिजीवी विचार और अभिव्यक्ति में शोध तथा वैज्ञानिक सिद्धांतों का पालन करें। पवित्र कुरआन, जो पूरी तरह सत्य पर आधारित किताब है, बिना सोचे-समझे राय देने और बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण के किसी बात को स्वीकार या अस्वीकार करने से रोकता है।

  • नए शैक्षणिक वर्ष पर हौज़ा-ए-इल्मिया के लिए 10 महत्वपूर्ण बिंदु; संकल्प करें कि हम «अदऊ ऐलल्लाह» के मिसदाक़ बनेंगे

    नए शैक्षणिक वर्ष पर हौज़ा-ए-इल्मिया के लिए 10 महत्वपूर्ण बिंदु; संकल्प करें कि हम…

    हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख ने कहा: हौज़ा-ए-इल्मिया को समय के हालात, समाज की आवश्यकताओं और दुनिया में होने वाले बदलावों की सही पहचान के साथ अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभाना चाहिए और धार्मिक शिक्षाओं की व्याख्या तथा इस्लाम के संदेश के प्रसार के रास्ते में आगे बढ़ना चाहिए।

  • खानदान-ए-नबूवत, इलाही करामत की बुलंदी है।आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी

    खानदान-ए-नबूवत, इलाही करामत की बुलंदी है।आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी

    हौज़ा / आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अ.स.के रिवायत की व्याख्या करते हुए पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) के परिवार को “पाकीज़ा वृक्ष” बताया, जिसकी जड़ें हज़रत इब्राहीम (अ.स.) से लेकर ख़ातमुल-अंबिया हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.ल.) तक फैली हुई हैं। उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) का पवित्र अस्तित्व एक अनमोल रत्न की तरह है, जिसमें तमाम फ़ज़ीलतें और पाकीज़गी एकत्र हैं और मुस्लिम उम्मत इस नूरानी सिलसिले की पैरवी पर गर्व करती है।

  • इस्तिग़फ़ार से स्वयं को सुगंधित करो; दुनिया और आख़ेरत की भलाई के द्वार खोलने की कुंजी

    इस्तिग़फ़ार से स्वयं को सुगंधित करो; दुनिया और आख़ेरत की भलाई के द्वार खोलने की कुंजी

    हज़रत आयतुल्लाह बहाउद्दीनी (क़) ने इस्तिग़फ़ार के ज़िक्र के महत्व के बारे में एक नैतिक उपदेश में इसे «दुनिया और आख़ेरत की भलाई के द्वार खोलने की कुंजी बताया है। उन्होंने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) के हवाले से कहा: इस्तिग़फ़ार से स्वयं को सुगंधित करो; कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे गुनाहों की बदबू तुम्हें तुम्हारे पालनहार के सामने शर्मिंदा कर दे।

  • आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हौज़ा-ए-इल्मिया की बुनियादी रणनीति / आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) के साथ इस्लामी उलूम के ढांचे की समीक्षा पर जोर

    आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में हौज़ा-ए-इल्मिया की बुनियादी रणनीति / आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस…

    आयतुल्लाह अली रज़ा आराफ़ी ने कहा कि हौज़ा-ए-इल्मिया को संज्ञानात्मक विज्ञान, आधुनिक तकनीकों और आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) का सामना करते हुए न तो उत्साह में आकर जल्दबाजी और सतही तरीके से इनका इस्तेमाल करना चाहिए और न ही लापरवाही, उपेक्षा और इन बदलावों को नकारने का रवैया अपनाना चाहिए। बल्कि बुद्धिमत्ता, गहराई, इज्तिहादी बसीरत और इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित दृष्टिकोण के साथ इन बदलावों को समझने, उनका आलोचनात्मक अध्ययन करने और उनसे लाभ उठाने की जरूरत है। हमें आर्टिफ़ीशियल इंटेलीजेंस (AI) को ध्यान में रखते हुए इस्लामी विज्ञान के पूरे ढांचे पर नए सिरे से विचार करना चाहिए।

  • ईरान के खिलाफ साम्राज्यवादी मोर्चे की 9 बड़ी कमजोरियां हैं: आयतुल्लाह आराफी

    ईरान के खिलाफ साम्राज्यवादी मोर्चे की 9 बड़ी कमजोरियां हैं: आयतुल्लाह आराफी

    क़ुम के इमामे जुमा ने कहा कि साम्राज्यवाद के मुकाबले में ईरानी जनता और नेतृत्व की दृढ़ता ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिका और साम्राज्यवादी व्यवस्था अपने ऐतिहासिक अन्याय, वैश्विक नफरत, आर्थिक जटिलताओं, राजनीतिक गतिरोध और गलत आकलनों के कारण अंदर से कमजोर और पराजय की ओर बढ़ रहे हैं।

  • “बहजतुद्दुआ” में अल्लाह से मोहब्बत बढ़ाने के लिए आयतुल्लाह बहजत की सलाह

    “बहजतुद्दुआ” में अल्लाह से मोहब्बत बढ़ाने के लिए आयतुल्लाह बहजत की सलाह

    हज़रत आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी बहजत ने अपनी किताब “बहजतुद्दुआ” के एक हिस्से में इस बात पर ज़ोर दिया है कि ज़िक्र और आध्यात्मिक आदाब में अल्लाह से मोहब्बत बढ़ाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा सलवात पढ़ने से आसान और प्रभावी कोई तरीका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर इंसान मोहब्बत के साथ सलवात भेजे, तो वह स्वयं महसूस कर सकता है कि यह ज़िक्र किस तरह उसे अपने माबूद और महबूब की ओर खींचता है।

  • हज़रत मासूमा (स) का क़ुम आगमन अहलेबैत के ज्ञान और शिक्षाओं के प्रचार का प्रारंभिक बिंदु है: आयतुल्लाह सईदी

    हज़रत मासूमा (स) का क़ुम आगमन अहलेबैत के ज्ञान और शिक्षाओं के प्रचार का प्रारंभिक…

    आयतुल्लाह सय्यद मुहम्मद सईदी ने पवित्र शहर क़ुम में हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के आगमन (23 रबीउल अव्वल 201 हिजरी) के ऐतिहासिक और सभ्यतागत महत्व को बयान करते हुए कहा कि हज़रत फ़ातिमा मासूमा सलामुल्लाह अलैहा के आशीर्वादपूर्ण अस्तित्व के कारण क़ुम अहलेबैत अलैहिमुस्सलाम के ज्ञान और शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार का केंद्र बना और इस सभ्यतागत आंदोलन के प्रभाव इस शहर से दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों तक फैल गए।

  • पैगंबर-ए-अकरम का नूर क़यामत तक इंसानों का मार्गदर्शन करता रहेगा: आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी

    पैगंबर-ए-अकरम का नूर क़यामत तक इंसानों का मार्गदर्शन करता रहेगा: आयतुल्लाहिल उज़्मा…

    आयतुल्लाहिल उज़्मा जाफ़र सुब्हानी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम वह नूर हैं, जिन्होंने पूरी मानवता को रोशन किया। आपके अस्तित्व का नूर हमेशा, यहां तक कि क़यामत तक, इंसानों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा।

  • कुरआन में इंतकाम का अर्थ केवल बदला नहीं, ईश्वरीय दंड भी है: रुस्तमनेजाद

    कुरआन में इंतकाम का अर्थ केवल बदला नहीं, ईश्वरीय दंड भी है: रुस्तमनेजाद

    हज और ज़ियारत अनुसंधान केंद्र के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रुस्तमनजाद ने “कुरआन की दृष्टि में इंतकाम और ख़ून का बदला” विषय पर आयोजित एक बैठक में कहा कि कुरआन की दृष्टि में क़िसास, इंतकाम और “सारुल्लाह” अलग-अलग अवधारणाएं हैं।

  • भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | मौलाना सय्यद अली हम्माद आबिदी फ़ैज़ाबादी

    भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | मौलाना सय्यद…

    पेशकश: दनिश नामा-ए-इस्लाम, इन्टरनेशनल नूर माइक्रो फ़िल्म सेंटर दिल्ली

  • सीरीक में शादी समारोह पर अमेरिका का हमला युद्ध अपराध का स्पष्ट उदाहरण है

    सीरीक में शादी समारोह पर अमेरिका का हमला युद्ध अपराध का स्पष्ट उदाहरण है

    आयतुल्लाह अलीरज़ा आराफी ने हुर्मुज़गान प्रांत के सीरीक इलाके में आवासीय क्षेत्रों और शादी समारोह पर अमेरिका के हवाई हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस हमले को राज्य प्रायोजित आतंकवाद और युद्ध अपराध का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए दुश्मन की पूरी तरह से निरोधक स्थिति हासिल होने तक उसके खिलाफ प्रतिरोध और जवाबी कार्रवाई जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • जनता की सेवा करना, रिज़वी संस्कृति का व्यावहारिक रूप है

    जनता की सेवा करना, रिज़वी संस्कृति का व्यावहारिक रूप है

    हौज़ा/ हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन सफ़ाई बुशहरी ने कहा कि जनता की सेवा करना, संस्कृति ए रिज़वी का व्यावहारिक रूप है।