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हिजाब और शरीअत के आदेशों को स्वीकार करना मोमिन का कर्तव्य है
मदरसे और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा कि अल्लाह तआला की ओर से जो कुछ भी निर्धारित किया गया है, वह हिकमत पर आधारित है और मोमिन इंसान को ईश्वरीय आदेशों के सामने समर्पण करना चाहिए।
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अयोग्य लोगों से मदद मांगना इंसान के आत्मसम्मान को खत्म कर सकता है
प्रोफेसर फ़ल्लाही ने ईमानदारी और धार्मिक जीवन में आत्मसम्मान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए अयोग्य और अविश्वसनीय लोगों से मदद मांगना, इंसान के अधिकार और उसकी मांग को नुकसान पहुंचाने की संभावना के अलावा, उसके आत्मसम्मान को भी कमजोर कर सकता है और उसे गलत मांगों तथा अनुचित परिस्थितियों को स्वीकार करने की ओर ले जा सकता है।
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महिला की बेअसत; इस्लामी भाईचारे को मजबूत करने में मुस्लिम महिला का आदर्श
क़ुरआन में तालूत की सेना की परीक्षा का प्रसंग, सत्य के मार्ग पर ईमान, आत्मसंयम और भय पर विजय की भूमिका की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। इस घटना में केवल एक छोटा-सा समूह ही अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए और अल्लाह के वादे पर भरोसा करते हुए ज़ुल्म के खिलाफ़ मुकाबले के मैदान में साथ देने के योग्य साबित हुआ।
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पालने से मस्जिद तक: बच्चों की धार्मिक तरबीयत के तीन महत्वपूर्ण चरण
बच्चे की धार्मिक तरबीयत अचानक या थोड़े समय में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाला और चरणबद्ध सफर है, जो गर्भावस्था के समय से शुरू होता है और बाद के वर्षों में धार्मिक विश्वासों की नींव मजबूत होने तक जारी रहता है। बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार समझदारी के साथ मस्जिद और इबादत के माहौल में ले जाना उसके अंदर शुरुआती लगाव और भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर सकता है और आगे चलकर मजबूत धार्मिक विश्वासों के निर्माण का कारण बन सकता है।
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50 डिग्री से अधिक की भीषण गर्मी में «सफ़ीराने ज़ैनबी» कारवां की गतिविधियां
50 डिग्री से अधिक की झुलसा देने वाली गर्मी और जोश से भरी अरबईन पदयात्रा के बीच जामेअतुल ज़हरा (स.) की समर्पित प्रचारक महिलाओं के एक समूह ने एक बार फिर साबित किया कि धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वालों का दायित्व समय और स्थान की सीमाओं से मुक्त और रुकने वाला नहीं है।
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हज़रत अली अकबर अ.स. कर्बला के युवा में नबवी अख़लाक़ का सर्वोत्तम प्रतिबिंब
हौज़ा / गोलिस्तान के महिला हौज़ा ए इल्मिया की निदेशक मोहतरमा हुसैनी वाइज़ ने कहा कि हज़रत अली अकबर (अ.स.) पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.ल.) के चरित्र, आचरण और नैतिकता का पूर्ण प्रतिबिंब थे। उन्होंने इतिहास के सबसे कठिन क्षणों में अपने समय के इमाम, इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति सर्वोच्च आदर, आज्ञाकारिता और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
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धार्मिक छात्राएँ, प्रतिरोध और अरबईन के संदेश की वास्तविक संदेशवाहक हैं: सुश्री सारा…
महिला इस्लामी शिक्षण संस्थानों की सांस्कृतिक एवं प्रचार-प्रसार मामलों की सहायक, सुश्री सारा तालेबी ने "जिहाद-ए-तबयीन" (सत्य एवं वास्तविकता को स्पष्ट करने के प्रयास) में महिलाओं की अद्वितीय भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इस वर्ष का महान अरबईन, ईरानी राष्ट्र की आशूराई परंपरा की निरंतरता, प्रतिरोध मोर्चे की उपलब्धियों की व्याख्या और मुस्लिम उम्मत की एकता का प्रतीक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हौज़ा की छात्राओं पर एक विशेष और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
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शहीद सर्वोच्च नेता (र) के अंतिम संस्कार में जनता की अभूतपूर्व भागीदारी दुश्मन के…
जामेअतुज़-ज़हरा (स) की निदेशक डॉ. सय्यदा ज़हरा बुरक़ई ने शहीद सर्वोच्च नेता (र) के अंतिम संस्कार में जनता की व्यापक उपस्थिति को दुश्मन के गलत आकलनों की नाकामी बताते हुए कहा कि करोड़ों लोगों ने अपनी भागीदारी के माध्यम से यह घोषणा की कि वे अपने खून की आख़िरी बूंद तक इस्लामी व्यवस्था, विलायत और नेतृत्व के साथ खड़े रहेंगे।
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आज़ादी की शुरुआत इंसान के अपने नफ़्स और इच्छाओं से छुटकारा पाने से होती है
डॉ. मासूमा हकीमियान ने कर्बला की घटना में वहब की माँ के व्यक्तित्व की ओर इशारा करते हुए उन्हें एक आज़ाद महिला के लिए बेहतरीन उदाहरण बताया, जिन्होंने अपने बेटे में भी यही भावना पैदा करने में सफलता हासिल की और उन्हें इमाम हुसैन (अ) की मदद के रास्ते पर ले गईं।
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शहीद आयतुल्लाह ख़ामेनई: कैसे क़ुरआन पश्चिमी सभ्यता के महिला संबंधी समीकरणों को उलट…
शहीद नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई अपने इन बयानों में पश्चिमी सभ्यता में महिला के प्रति दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि उस ढांचे में पुरुष को आदर्श माना जाता है और महिला सामाजिक स्थान प्राप्त करने के लिए पुरुषों जैसे पैटर्न की नकल करने पर मजबूर होती है। इसके विपरीत, पवित्र क़ुरआन अलग-अलग और वास्तविक आदर्श प्रस्तुत करता है।
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बेअसत बाल शिविर में ईद-ए-सईद ग़दीर के अवसर पर समारोह का आयोजन
बेअसत बाल शिविर में ईद-ए-सईद ग़दीर के शुभ और आनंदमय अवसर पर एक सुंदर एवं उद्देश्यपूर्ण समारोह आयोजित किया गया।
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जिहाद-ए-तबईन में महिला छात्राओं की भूमिका रणनीतिक और अत्यंत प्रभावशाली है
मदरसा-ए-इल्मिया-ए-तखस्सुसी ज़हरा (स) सारी की प्रिंसिपल ने कहा: महिला छात्राओं की भूमिका "जिहाद-ए-तबईन" में रणनीतिक और अत्यंत प्रभावशाली है और यह सामाजिक सामंजस्य को मजबूत करने, नरम जंग (सॉफ्ट वॉर) का मुकाबला करने और सांस्कृतिक एवं क्रांतिकारी संदेशों के प्रसारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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पश्चिमी सभ्यता, आधुनिकतावाद और नई जाहिलियत है / शिक्षकों का कर्तव्य नई इस्लामी सभ्यता…
मस्जिद-ए-जमकरान के मुतावल्ली हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन सय्यद अली अकबर अजाक़ नेजाद ने एक समारोह में कहा कि आज पश्चिम में कुछ ऐसे लोग हैं कि यदि उनके सामने इस्लाम की वास्तविकता को प्रस्तुत किया जाए तो वे उसे स्वीकार कर लेंगे।
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दुनिया में न्याय और शांति के लिए धार्मिक नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका, भाईचारे और…
अंतर्राष्ट्रीय अकादमिक बैठक में वक्ताओं ने कहा है कि दुनिया में स्थायी शांति और न्याय की स्थापना के लिए धार्मिक नेताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इस उद्देश्य के लिए मानवीय भाईचारे, साझा मूल्यों और सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक है।
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मौजूदा "हाइब्रिड युद्ध" में महिलाओं का समाज में उपस्थित होना एक धार्मिक कर्तव्य है
जामेअतुज़ ज़हरा (स) की सांस्कृतिक एवं प्रचार मामलों की प्रमुख ने मौजूदा संवेदनशील स्थिति में शिक्षकों के कर्तव्यों को स्पष्ट करते हुए शहीद मुताहरी (र) के विचारों पर पुनर्विचार करने, व्यावसायिक नैतिकता के पालन और आज के सामाजिक एवं सांस्कृतिक बदलावों में महिलाओं की प्रभावी भूमिका पर जोर दिया।
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मअनवीयत और अक़्लानियत को पुनर्जीवित करने में मस्जिदों की भूमिका किसी पर छिपी नहीं…
जामेअतुज़्ज़हरा (स) की इस्लामी शिक्षा एवं प्रशिक्षण की वैज्ञानिक समिति की सचिव ने एक नोट में मअनवीयत और अक़्लानियत को पुनर्जीवित करने में मस्जिदों की अद्वितीय भूमिका पर जोर दिया है।
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शहीद आयतुल्लाह ख़ामेनई के वक्तव्यों के प्रकाश में इस्लामी समाज में पुत्रियो का स्थान
इस्लामी समाज में लड़कियों की भूमिका, जिम्मेदारियों और स्थान के संदर्भ में इंक़िलाब के शहीद नेता के वक्तव्यों को फिर से सामने लाया गया है, जिनमें इस बात पर जोर दिया गया है कि लड़कियाँ न केवल समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, बल्कि वे इसके निर्माण और विकास में मौलिक भूमिका निभा सकती हैं, बशर्ते वे अपनी इस्लामी पहचान, इफ्फत व हया और नैतिक मूल्यों को बनाए रखें।
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युद्ध की स्थिति में जनता को जागरूक करना और उनका हौसला बढ़ाना उलेमा की महत्वपूर्ण…
हौज़ा / जामे अतुज़्ज़हेरा स.ल. के इस्लामी अध्ययन विभाग की प्रमुख डॉ. ज़हेरा शरीअत नासिरी ने कहा है कि युद्ध की स्थितियों में समाज के प्रभावशाली और शिक्षित लोगों की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जनता में सही जागरूकता पैदा करना और आशा को जीवित रखना है।
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महिलाओ पर ध्यान देने और उनके लिए हमदर्दी ईमान को कैसे मज़बूत करती है?
हौज़ा ए इल्मिया और यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने कहा: महिलाएँ भावनाओं की पहचान हैं, उनका वजूद बहुत बारीक है, इसीलिए जो लोग ईमान वाले हैं और जिनकी रूह ज़्यादा बारीक है, वे औरतों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, और जो औरतों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, उनकी रूह ज़्यादा बारीक हो जाती है, इसलिए उनका ईमान भी मज़बूत होता है।
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रमज़ान के महीने में महिलाओ के कर्तव्य और उनका अज़ीम सवाब
रमज़ान औरतों को अपनी कीमत पहचानने, अपनी ज़िम्मेदारी को इबादत समझने और अपनी भूमिका से समाज में रोशनी फैलाने का संदेश देता है। जब एक औरत खूबसूरत होती है, तो एक परिवार खूबसूरत होता है, और जब परिवार खूबसूरत होते हैं, तो पूरे देश में सुधार की लहर फैलती है।