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लखनऊ: हौज़ा इल्मिया ज़ैनबिया में कुरआन शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का समापन, कुरआनी…
हौज़ा इल्मिया ज़ैनबिया, मुफ़्तीगंज में अल-कौसर कुरआन क्लासेज़ के अंतर्गत एक महीने तक चले कुरआन शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर उलमा ने कुरआन की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अध्यापन को बढ़ावा देने तथा नई पीढ़ी की कुरआनी तरबीयत के लिए छात्राओं को प्रभावी ढंग से तैयार करने पर ज़ोर दिया।
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इमाम ज़माना (अ) से तजदीद-ए-अहद के लिए हरम-ए-हज़रत मासूमा (स) में हौज़ा इल्मिया की…
ईरान के पवित्र नगर क़ुम में हौज़ा इल्मिया ख़्वाहर (महिला धार्मिक शिक्षण संस्थान) के नए शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश लेने वाली 600 छात्राओं ने हज़रत फ़ातिमा मासूमा (स) के पवित्र हरम में आयोजित एक समारोह में इमाम ज़माना (अज्जल्लाहु तआला फ़रजहुश्शरीफ़) से अपने अहद का नवीनीकरण किया और धार्मिक शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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बच्चों की धार्मिक तरबीयत मोहब्बत से करें, ज़बरदस्ती से नहीं: हुज्जतुल इस्लाम रज़ा…
इस्लामीतरबीयत के विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रज़ा यूसुफ़ज़ादेह ने कहा है कि बच्चों की धार्मिक तरबीयत का उद्देश्य केवल नमाज़, रोज़ा और क़ुरआन की शिक्षा देना नहीं, बल्कि उनके दिलों में धर्म के प्रति प्रेम पैदा करना और उनके व्यक्तित्व को निखारना भी है। उनके अनुसार, धार्मिक तरबीयत इंसान को जीवन के गहरे उद्देश्य और आख़िरत की अवधारणा से जोड़ती है, जबकि धर्म से रहित तरबीयत कठिन परिस्थितियों में इंसान को जीवन के उद्देश्य से दूर कर सकती है।
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अपने इल्म को व्यावहारिक क्षेत्र में इस्तेमाल करें, धार्मिक और सामाजिक समस्याओं का…
हौज़ा / जामेअतुल ज़हेरा स.ल. की निदेशक ने छात्राओं की शैक्षणिक क्षमताओं को व्यावहारिक क्षेत्र में इस्तेमाल करने और व्यवस्था तथा समाज की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता विकसित करने की ज़रूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान में मानविक के कॉम्प्लेक्स ने शिक्षा एवं तरबीयत, दर्शन एवं हिकमत तथा इस्लामी कलाम के शैक्षणिक समूहों के आधार पर अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
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हसद; दुनिया और आख़िरत में इंसान की नाकामी का सबसे बड़ा कारण है
हौज़ा / मदरसा-ए-इल्मिया फ़ातेमिया की प्रचारक ने क़ुरआन की आयतों और ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए हसद को इंसान की दुनिया और आख़िरत में नाकामी का कारण बताया और इससे बचने तथा इसे नियंत्रित करने के उपाय बताए।
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शुक्रगुज़ारी इंसान की ज़िंदगी के हर पहलू में जारी रहनी चाहिए
हौज़ा / धार्मिक शिक्षिका सकीना आफ़रंद ने मोमिनाने ज़िंदगी में शुक्रगुज़ारी के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि शुक्रगुज़ारी केवल कुछ शब्द कहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इंसान की ज़िंदगी के हर पहलू में दिल, ज़ुबान और अमल के रूप में दिखाई देनी चाहिए।
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क़यामत के दिन कब्रों से कैसे उठाए जाएँगे इंसान? ‘ व ऐज़ल क़ोबूरो बोसेरत’ में छिपा…
क़ुरआन मजीद इंसान को उसकी वास्तविकता, जीवन के उद्देश्य और उसके अंजाम से अवगत कराने के लिए बार-बार क़यामत और आख़िरत का उल्लेख करता है। दुनिया की ज़िंदगी हालांकि इंसान के लिए कर्म और अधिकार-चयन का मैदान है, लेकिन उसका सफ़र मौत पर समाप्त नहीं होता। मौत के बाद एक दूसरी ज़िंदगी है, जिसमें इंसान अपने कर्मों के परिणामों का सामना करेगा।
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हिजाब महिला की गरिमा, पहचान और सामाजिक शक्ति का नाम
शर्म और हया की रक्षा कमजोर होने के पीछे अतीत की अतिवादी सोच, सांस्कृतिक संस्थाओं की लापरवाही और उन गलतियों का मेल है, जिनका दोष धर्म के सिर मढ़ दिया गया। दुश्मन ने सामाजिक मतभेदों का फायदा उठाकर इस स्थिति को एक पहचान के संकट में बदल दिया है।
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सफल छात्र वही है जो अपने ज्ञान, नैतिकता, कौशल और आचरण को एक साथ लेकर चले
श्रीमति नाहिद कासिमपुर ने छात्र जीवन के आवश्यक सिद्धांतों और नियमों, शिक्षा प्राप्त करने की बुनियादी जरूरतों तथा इसमें सफलता के रहस्यों को बताते हुए कहा कि सफल छात्र जीवन वास्तव में अध्ययन और आत्मशुद्धि, अंतर्दृष्टि और नैतिकता, विशेषज्ञता और आध्यात्मिकता तथा ज्ञान और आचरण का सुंदर समन्वय है।
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परिवार में जिम्मेदारियों का न्यायपूर्ण बंटवारा महिलाओं की सामाजिक भागीदारी का आधार…
एक सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कहा कि मातृत्व और पत्नी की भूमिका अपने आप में महिला की सामाजिक भागीदारी में बाधा नहीं हैं। लेकिन यदि समाज और परिवार महिला को कोई सहयोग न दें और सारी जिम्मेदारियां एक साथ उसके कंधों पर डाल दें, तो स्वाभाविक है कि महिला थकान और मानसिक दबाव का शिकार हो जाए और अपनी अलग-अलग भूमिकाओं को सही ढंग से निभा न सके।
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इमाम हसन अस्करी (अ) के कथन में मोमिन की पांच निशानियां
श्रीमति करमी ने इमाम हसन अस्करी (अ) की एक हदीस का उल्लेख करते हुए इमाम के कथन के अनुसार मोमिन और शिया की पांच निशानियां बताईं।
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जामेअतुज़ ज़हरा (स.) में छात्राओं की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए नई योजना
क़ुम अल मुक़द्दस की जामिया ज़हरा (स.) की निदेशक सय्यदा ज़हरा बरक़ई ने कहा है कि नए शैक्षणिक वर्ष से छात्राओं की शिक्षा के साथ-साथ उनके व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि वे धर्म की शिक्षा प्राप्त करने के साथ अपनी व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी बेहतर ढंग से निभा सकें।
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हिजाब और शरीअत के आदेशों को स्वीकार करना मोमिन का कर्तव्य है
मदरसे और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा कि अल्लाह तआला की ओर से जो कुछ भी निर्धारित किया गया है, वह हिकमत पर आधारित है और मोमिन इंसान को ईश्वरीय आदेशों के सामने समर्पण करना चाहिए।
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अयोग्य लोगों से मदद मांगना इंसान के आत्मसम्मान को खत्म कर सकता है
प्रोफेसर फ़ल्लाही ने ईमानदारी और धार्मिक जीवन में आत्मसम्मान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए अयोग्य और अविश्वसनीय लोगों से मदद मांगना, इंसान के अधिकार और उसकी मांग को नुकसान पहुंचाने की संभावना के अलावा, उसके आत्मसम्मान को भी कमजोर कर सकता है और उसे गलत मांगों तथा अनुचित परिस्थितियों को स्वीकार करने की ओर ले जा सकता है।
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महिला की बेअसत; इस्लामी भाईचारे को मजबूत करने में मुस्लिम महिला का आदर्श
क़ुरआन में तालूत की सेना की परीक्षा का प्रसंग, सत्य के मार्ग पर ईमान, आत्मसंयम और भय पर विजय की भूमिका की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। इस घटना में केवल एक छोटा-सा समूह ही अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए और अल्लाह के वादे पर भरोसा करते हुए ज़ुल्म के खिलाफ़ मुकाबले के मैदान में साथ देने के योग्य साबित हुआ।
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पालने से मस्जिद तक: बच्चों की धार्मिक तरबीयत के तीन महत्वपूर्ण चरण
बच्चे की धार्मिक तरबीयत अचानक या थोड़े समय में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाला और चरणबद्ध सफर है, जो गर्भावस्था के समय से शुरू होता है और बाद के वर्षों में धार्मिक विश्वासों की नींव मजबूत होने तक जारी रहता है। बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार समझदारी के साथ मस्जिद और इबादत के माहौल में ले जाना उसके अंदर शुरुआती लगाव और भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर सकता है और आगे चलकर मजबूत धार्मिक विश्वासों के निर्माण का कारण बन सकता है।
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50 डिग्री से अधिक की भीषण गर्मी में «सफ़ीराने ज़ैनबी» कारवां की गतिविधियां
50 डिग्री से अधिक की झुलसा देने वाली गर्मी और जोश से भरी अरबईन पदयात्रा के बीच जामेअतुल ज़हरा (स.) की समर्पित प्रचारक महिलाओं के एक समूह ने एक बार फिर साबित किया कि धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वालों का दायित्व समय और स्थान की सीमाओं से मुक्त और रुकने वाला नहीं है।
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हज़रत अली अकबर अ.स. कर्बला के युवा में नबवी अख़लाक़ का सर्वोत्तम प्रतिबिंब
हौज़ा / गोलिस्तान के महिला हौज़ा ए इल्मिया की निदेशक मोहतरमा हुसैनी वाइज़ ने कहा कि हज़रत अली अकबर (अ.स.) पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स.ल.) के चरित्र, आचरण और नैतिकता का पूर्ण प्रतिबिंब थे। उन्होंने इतिहास के सबसे कठिन क्षणों में अपने समय के इमाम, इमाम हुसैन (अ.स.) के प्रति सर्वोच्च आदर, आज्ञाकारिता और समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत किया।
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धार्मिक छात्राएँ, प्रतिरोध और अरबईन के संदेश की वास्तविक संदेशवाहक हैं: सुश्री सारा…
महिला इस्लामी शिक्षण संस्थानों की सांस्कृतिक एवं प्रचार-प्रसार मामलों की सहायक, सुश्री सारा तालेबी ने "जिहाद-ए-तबयीन" (सत्य एवं वास्तविकता को स्पष्ट करने के प्रयास) में महिलाओं की अद्वितीय भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इस वर्ष का महान अरबईन, ईरानी राष्ट्र की आशूराई परंपरा की निरंतरता, प्रतिरोध मोर्चे की उपलब्धियों की व्याख्या और मुस्लिम उम्मत की एकता का प्रतीक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हौज़ा की छात्राओं पर एक विशेष और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
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शहीद सर्वोच्च नेता (र) के अंतिम संस्कार में जनता की अभूतपूर्व भागीदारी दुश्मन के…
जामेअतुज़-ज़हरा (स) की निदेशक डॉ. सय्यदा ज़हरा बुरक़ई ने शहीद सर्वोच्च नेता (र) के अंतिम संस्कार में जनता की व्यापक उपस्थिति को दुश्मन के गलत आकलनों की नाकामी बताते हुए कहा कि करोड़ों लोगों ने अपनी भागीदारी के माध्यम से यह घोषणा की कि वे अपने खून की आख़िरी बूंद तक इस्लामी व्यवस्था, विलायत और नेतृत्व के साथ खड़े रहेंगे।