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इस्लाम ने महिलाओं और पुरुषों को महान सम्मान प्रदान किया है
हौज़ा / सामाजिक समीकरणों में स्त्री और पुरुष का स्थान और सामाजिक परिवर्तन में प्रत्येक की भूमिका, मानव चिंतन की प्राचीन चुनौतियों में से एक रही है।
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इस्लामिक क्रांति के लीडर के खिलाफ प्रोपेगैंडा असल में आइडियोलॉजी के खिलाफ है
हौज़ा / आयतुल्लाह सय्यद अली खामेनेई के खिलाफ प्रोपेगैंडा असल में किसी एक इंसान के खिलाफ नहीं बल्कि आइडियोलॉजी के खिलाफ है। यह उस सोच को दबाने की कोशिश है जो दबे-कुचले लोगों को बढ़ावा देती है, घमंडी सिस्टम को चुनौती देती है और इंसान को उसकी असली पहचान से जोड़ती है।
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इमाम के उत्तराधिकारी होने के झूठे दावेदार
हौज़ा / यह बात निश्चित है कि जितना कोई विश्वास सच्चाई के करीब होता है और लोगों के दिलों में जगह बना लेता है, उतना ही अधिक स्वार्थी लोग उसका गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। “महदीवाद” की शिक्षा भी अपनी खास और आकर्षक विशेषताओं के कारण, और क्योंकि यह लोगों के दिलों में गहराई तक असर करती है, बहुत बार अयोग्य लोगों द्वारा गलत तरीक़े से इस्तेमाल की गई है।
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सूरह हम्द में अल्लाह तआला अपने बंदों की ज़बान में क्यों बात करता हैं?
हौज़ा / सूरह हम्द उन सूरह में से है जिसमें बात बंदे की ज़बान में कही गई है और इसे इस तरह से लिखा गया है कि ऐसा लगता है जैसे बंदा खुद अल्लाह तआला से सीधे बात कर रहा है। इसके ज़रिए बंदों को दुआ और इबादत का सही तरीका सिखाया जाता है।
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हसद के कड़वे परिणाम
हौज़ा / इमाम हादी (अ) ने एक रिवायत में इंसान की ज़िंदगी में हसद के असली और कड़वे परिणामो के बारे में बताया है।
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16 रजब उल मुरज्जब 1447 - 6 जनवरी 2026
हौज़ा / इस्लामी कैलेंडरः 16 रजब उल मुरज्जब 1447 - 6 जनवरी 2026
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हज़रत इमाम अली (अ) की निगाह में हलाल जीविका का महत्व
हौज़ा / हज़रत इमाम अली अ.स.के नज़दीक कसबे हलाल बेहतरीन सिफ़त थी। जिस पर आप खुद भी अमल पैरा थे। आप रोज़ी कमाने को ऐब नहीं समझते थे और मज़दूरी को बहुत ही अच्छी निगाह से देखते थे।
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आयतें ज़िंदगी | मतभेद और झगड़े के समय इन आयतों को न भूलें
हौज़ा / कई दिमागी और काम के बीच मतभेद इसलिए होते हैं क्योंकि लोग अलग-अलग वजहों से एक ही सच को ठीक से समझ नहीं पाते, लेकिन कयामत के दिन, जब सारे परदे हट जाएँगे, तो असली और बिना मिलावट वाला सच सामने आएगा, और अल्लाह, जिसे हर चीज़ का पूरा ज्ञान है, वह न सिर्फ़ इन मतभेदों के नतीजे बताएगा, बल्कि हर राय और हर काम के पीछे के इरादे और छिपे हुए पहलू भी सबको बताएगा।
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हज़रत ज़ैनब की दरबारे इब्ने ज़्याद में एतिहासिक ललकार
हौज़ा / कर्बला के वाक़िये के बाद जब अहले बैत अ.स. को क़ैदी बना कर कूफ़ा लाया गया और दरबार-ए-इब्ने ज़्याद सजा तो ज़ालिम यह समझ रहा था कि उसने हक़ की आवाज़ को हमेशा के लिए ख़ामोश कर दिया है। मगर वह नहीं जानता था कि इस दरबार में एक ऐसी अज़ीम खातून मौजूद हैं, जिनकी ज़बान तलवार से ज़्यादा तेज़ और जिनका हौसला पहाड़ों से ज़्यादा मज़बूत है और वह हैं हज़रत ज़ैनब बिन्ते अली स.अ. थी जिसने अपने खुत्बे के जरिए दरबार हिला दिया।
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हज़रत ज़ैनब (स) सब्र, शुजाअत और ईमान की अनुपम मिसाल
हौज़ा / जिस तरह मक्का के अशांत वातावरण में पवित्र पैगंबर (स.अ.व.व.) की साथी खदीजा थी, उसी तरह कर्बला की घटना में इमाम हुसैन (अ.स.) और इमाम सज्जाद (अ.स.) की साथी, रहस्यपाठी और उद्देश्य की रक्षक एंवम प्रचारिका हज़रत ज़ैनब (स.अ.) थी।
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मुजाहिदे कर्बला हज़रत ज़ैनब-ए-कुबरा (स)
हौज़ा / हज़रत ज़ैनब-ए-कुबरा (स) की अज़मत सिर्फ़ एक महान महिला की नहीं है, बल्कि सोच, सब्र और जिहाद के पूरे स्कूल की महानता और धर्म की महानता है। कर्बला के बाद, उन्होंने एक ऐसा रोल निभाया जिसके बिना हुसैनी क्रांति इतिहास में सुरक्षित नहीं रह पाती।
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माँ की मोहब्बत के साए में परवरिश, बच्चे की तरबियत का बेहतरीन तरीक़ा है
हौज़ा / इंसान के बच्चे की तरबियत का बेहतरीन तरीक़ा यह है कि माँ की मोहब्बत के साए में परवरिश पाए। वो औरतें जो अपनी औलाद को इस तरह की अल्लाह की नेमत से वंचित रखती हैं, ग़लती का शिकार हैं। उनकी वजह से औलाद को भी नुक़सान पहुंचता है।
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हज़रत ज़ैनब स.ल.तमाम महिलाओं के लिए एक आदर्श हैं:मोहतरमा ज़ाएफ़ी
हौज़ा / जामेअतुज़ ज़हेरा की व्याख्याता और इस्लामी इतिहास की शोधकर्ता मोहतरमा राहेला ज़ाएफ़ी ने कहा कि हज़रत ज़ैनब (स) के जीवन का अध्ययन आज की मुस्लिम महिलाओं को सिखाता है कि कैसे परीक्षा और संकट के समय आत्मविश्वास, पारिवारिक सहानुभूति और साहस के साथ मोक्ष का मार्ग खोजें एक नमूना पेश किया।
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٘शरई अहकाम | एतेकाफ़ के दौरान ज़रूरी निकासी की समय सीमा
हौज़ा/ आयतुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई ने “एतेकाफ़ में किसी व्यक्ति के लिए ज़रूरी काम के लिए मस्जिद से निकलने का सही समय” विषय पर एक सवाल का जवाब दिया है।
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मानवता का रोल मॉडल; हज़रत ज़ैनब ए कुबरा (स)
हौज़ा/ इंसानी इतिहास का सबसे बड़ा सवाल यह रहा है कि क्या ताकत सच को जन्म देती है या सच ताकत को? दुनिया के अलग-अलग धर्मों, सभ्यताओं और संस्कृतियों ने इस सवाल का अपने-अपने तरीके से जवाब दिया, लेकिन हज़रत ज़ैनब ए कुबरा (स) ने इसे प्रैक्टिकल इतिहास में बदल दिया। उन्होंने साबित किया कि असली ताकत न तो तलवार में है और न ही तख्त में, बल्कि सच्चाई, नैतिक हिम्मत और इंसानी इज्ज़त में है। इसीलिए हज़रत ज़ैनब (स) का रोल किसी एक धर्म या कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ग्लोबल इंसानी विरासत बन गया है।
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मुश्किलों में इबादत
हौज़ा/ हज़रत इमाम सज्जाद (अ) ने एक रिवायत में हज़रत ज़ैनब (स) की रूहानी महानता और इबादत के ऊँचे लेवल की ओर इशारा किया है।
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15 रजब उल मुरज्जब 1447 - 5 जनवरी 2025
हौज़ा / इस्लामी कैलेंडरः 15 रजब उल मुरज्जब 1447 - 5 जनवरी 2025
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आईना ए सब्र व रज़ा: ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाहे अलैहा
हौज़ा / हज़रत ज़ैनब कुबरा (स) सब्र की पूरी तस्वीर हैं जिन पर रज़ा की रोशनी हमेशा चमकती रही। वह रज़ा की जीती-जागती कहानी हैं जिस पर सब्र की रोशनी चमक रही है। इतिहास की सफ़ेद चादर पर, आपकी शख्सियत सब्र और हिम्मत के वो अक्षर हैं जो समय की भारी बारिश में भी नहीं मिटते।
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असली और सुपर पावर सिर्फ़ अल्लाह की होती है / तब्स से वेनेजुएला तक एक सबक, आयतुल्लाह…
हौज़ा / आयतुल्लाह अब्बास काबी ने एक एनालिटिकल आर्टिकल में पवित्र कुरान की रोशनी में असली सुपर पावर के मतलब पर रोशनी डाली है। उनके अनुसार, पवित्र कुरान साफ़ तौर पर कहता है कि असली पावर सिर्फ़ अल्लाह तआला की होती है और दुनिया की सभी दिखने वाली ताकतें उसकी मर्ज़ी के अधीन हैं।
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शरई अहकाम | नमाज़ जमात मे मामूम का इमाम के साथ तालमेल नही बिठा पाना
हौज़ा / आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने इस एक सवाल के जवाब में, जिसमें नमाज जमात मे मामूम का बीमारी की वजह से इमाम के रुकूअ या सजदा से पहले सिर उठाने के हुक्म के बारे में पूछा गया था।