ताजा समाचार
अधिक देखी गई ख़बरें
गैलरी
لیستی صفحه سرویس هندی
-
कुरआन का नुस्खा: आर्थिक परेशानियों को दूर करने और जीवन में खुशहाली लाने के उपाय
कभी-कभी समाज के लोग और जिम्मेदार अधिकारी, जो सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के तरीकों को लेकर चिंतित रहते हैं, खुद को रुकावटों, प्रतिबंधों और दुश्मनी के बीच घिरा हुआ महसूस करते हैं। कई बार यही स्थिति उनके प्रशासन और जिम्मेदारियों को निभाने में अस्थिरता का कारण बन जाती है। जबकि इस संसार के सृष्टिकर्ता और उपास्य ने इसका एक उपचार प्रस्तुत किया है।
-
नमाज़े जमाअत की फज़ीलत
पैग़म्बर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद (स) ने एक रिवायत में नमाज़े जमाअत की फज़ीलत और अकेले पढ़ी जाने वाली नमाज़ की तुलना में उसकी श्रेष्ठता का उल्लेख किया है।
-
यमन से हुर्मुज स्ट्रेट तक: मुस्लिम दुनिया किसके हित के लिए युद्ध लड़ रही है?
मध्य पूर्व एक बार फिर ऐसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ एक छोटी-सी चिंगारी पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में धकेल सकती है। यमन में अंसारुल्लाह की बढ़ती ताकत, बाब अल-मंदब का महत्व, होर्मुज़ जलडमरूमध्य की संवेदनशील स्थिति और सऊदी अरब की यमन में फिर से दखलंदाजी ने हमारे सामने एक महत्वपूर्ण सवाल पूरी गंभीरता के साथ खड़ा कर दिया है: क्या मुस्लिम देश अपना युद्ध खुद लड़ रहे हैं या किसी और के हितों के लिए एक-दूसरे के खिलाफ खड़े किए जा रहे हैं?
-
मृत्यु के बाद भी बाकी रहने वाली तीन चीजें
पैग़म्बर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) ने एक हदीस में ऐसे तीन नेक कार्यों का उल्लेख किया है, जिनका लाभ इंसान की मृत्यु के बाद भी जारी रहता है।
-
ब्रिक्स सम्मेलन और ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा, ईरान और भारत के पुराने संबंधों…
नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान की भारत यात्रा एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना है। इस यात्रा को केवल एक औपचारिक मुलाकात या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे ईरान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों की लंबी परंपरा भी है और बदलती हुई वैश्विक राजनीति की नई आवश्यकताएँ भी।
-
अंसारुल्लाह की प्रगति: प्रतिरोधी मोर्चे का करिश्मा और ईरान की सफलताओं का ततिम्मा
अगर आज हुर्मुज़ स्ट्रेट और बाब अल-मंदब की बात की जाए, तो क्षेत्रीय शक्ति के समीकरण में दोनों की निर्णायक भूमिका है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान के पास दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साधन है, जबकि अंसारुल्लाह आंदोलन भी बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में ऐसी स्थिति तक पहुंच चुका है कि इस जलमार्ग के यमनी हिस्से पर उसका प्रभावी नियंत्रण है।
-
शरई अहकाम । मन्नत पूरी होने के बाद नज़्र
आयतुल्लाह नूरी हमदानी ने “मन्नत पूरी होने के बाद नज्र” के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया है।
-
इल्म के बग़ैर अमल
इमाम जाफर सादिक (अ) ने एक रिवायत में इल्म पर अमल करने की जरूरत और आलिम तथा जाहिलो के बीच इल्म के प्रति उनके रवैये के अंतर पर जोर दिया है।
-
अल्लाह के शेरों को लोमड़ी जैसी चालाकी नहीं आती
इतिहास इस बात का गवाह है कि मानव जीवन की शुरुआत से ही सत्य और असत्य, प्रकाश और अंधकार तथा उजाले और अंधेरे के बीच संघर्ष होता आया है। हत्यारे और मारे गए, अत्याचारी और पीड़ित की नस्ली और वैचारिक लकीरें इतिहास की हथेली पर हमेशा साथ-साथ चलती रही हैं और समय-समय पर एक-दूसरे को काटती रही हैं।
-
धर्म की व्याख्या में इफ़रात और तफ़रीत के खतरो पर सिरात से भी पतला मार्ग
धर्म के पालन और धार्मिक विषयों पर विचार व्यक्त करने के दौरान इफ़रात और तफ़रीत से बचना तथा संतुलन बनाए रखना हमेशा एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। धार्मिक ग्रंथों में ‘सिरात’ को बाल से भी पतली राह के रूप में बताया गया है, ताकि संतुलन बनाए रखने की कठिनाई को स्पष्ट किया जा सके।
-
शरई अहकाम । कृत्रिम श्वसन उपकरण बंद करने का शरई हुक्म
आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली सीस्तानी ने कृत्रिम श्वसन उपकरण बंद करने के संबंध में पूछे गए एक सवाल का जवाब दिया है।
-
शुक्रवार के दिन सवाब और अज़ाब का कई गुना बढ़ जाना
इमाम बाक़िर (अ) ने एक रिवायत में शुक्रवार के दिन की अहमियत और इस दिन अच्छे और बुरे कर्मों के प्रभाव के कई गुना बढ़ जाने की ओर इशारा किया है।
-
जीवनसाथी का दिल कैसे खुश रखें? / वैवाहिक संबंध को बेहतर बनाने के पाँच सुनहरे सिद्धांत
परिवार के मामलों के सलाहकार और विशेषज्ञ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन रज़ा यूसुफ़ज़ादेह ने अपनी बातचीत के दौरान जीवनसाथी को उचित समय देना, उसकी बात ध्यान से सुनना, सहानुभूति और हमदर्दी का एहसास, उसकी कद्र करना और प्यार का स्पष्ट एवं अलग-अलग तरीकों से इज़हार करने जैसी पाँच बुनियादी बातों को समझाया। उन्होंने पति-पत्नी के बीच भावनात्मक खुशी और आपसी लगाव को बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके भी बताए।
-
अल्लाह के डर से पाप छोड़ने का इनाम
हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) ने एक हदीस में अल्लाह के डर से पाप छोड़ने के इनाम की ओर संकेत किया है।
-
मध्य पूर्व का त्रासदीपूर्ण संकट: फिलिस्तीनियों का समर्थन करने वालों को सजा क्यों…
कुछ दिन पहले यमन के हूतियों पर इज़राइल और अमेरिका के संयुक्त हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पश्चिमी साम्राज्यवाद और ज़ायोनी शासन के लिए कोई नैतिक सीमा नहीं है। इन हमलों का उद्देश्य इसके अलावा कुछ और नहीं था कि यह संदेश दिया जाए कि जो भी फिलिस्तीनियों के पक्ष में आवाज उठाएगा, उसे कुचल दिया जाएगा। लेकिन क्या वास्तव में हूतियों ने कोई गलती की थी? क्या गाज़ा के बच्चों, भूखी माताओं और बेघर परिवारों की मदद करना अपराध है? अगर यह अपराध है, तो आज मानवता को स्वयं पर शर्म आनी चाहिए।
-
क्या कुरआन ने गुनहगार महिलाओं को मौत तक कैद करने को कहा है?
सूर ए निसा की आयत 15 और 16 उन आयतों में शामिल हैं, जिन्हें पहली नजर में पढ़ने पर यह सवाल उठता है कि किसी गलत काम और उसकी सजा के बारे में कुरआन का तरीका क्या है। खास तौर पर वहां, जहां महिलाओं को मौत आने तक घरों में रोकने और उन्हें “तकलीफ देने” की बात कही गई है। पहली नजर में इन शब्दों से कुरआन के आदेश की कैसी तस्वीर सामने आती है और वास्तविक मामला क्या है?
-
शरई अहकाम । इस्लामी देशों पर विदेशी प्रभुत्व की साजिशों का मुकाबला करना जरूरी है
हज़रत आयतुल्लाह नूरी हमदानी ने “इस्लामी देशों पर विदेशी प्रभुत्व की साजिशों का मुकाबला” करने से संबंधित एक सवाल का जवाब देते हुए मुसलमानों की जिम्मेदारी बताई है।
-
ईरान का प्रतिरोध और अमेरिका की बेबसी!
जब दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति किसी देश पर हमला करती है, तो आमतौर पर यह दावा भी किया जाता है कि दुश्मन की सैन्य शक्ति को कुछ ही दिनों में खत्म कर दिया जाएगा, उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया जाएगा और युद्ध को मनचाहे परिणाम तक पहुंचा दिया जाएगा। ईरान के मामले में भी कुछ ऐसा ही अनुमान लगाया गया था।
-
मनुष्य के अहंकार पर आश्चर्य
इमाम सज्जाद (अ) ने एक रिवायत में मनुष्य के अहंकार की बेबुनियादी और उसके अंत की तुच्छ एवं भौतिक अवस्था की ओर इशारा किया है।
-
अज़ादारी और मरजइयत: शिया संप्रदाय के दो मजबूत बाज़ू
मानव इतिहास में कुछ आंदोलन समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं, कुछ विचार किताबों के पन्नों में दफन हो जाते हैं और कुछ हस्तियाँ अपने दौर के समाप्त होने के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं। लेकिन कुछ सच्चाइयाँ ऐसी होती हैं, जो समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर नए दौर में नई जागरूकता के साथ जीवित रहती हैं। शिया धर्म भी ऐसी ही एक जीवंत सच्चाई है, जिसकी नींव केवल विचारों पर नहीं, बल्कि खून, चेतना, बलिदान, प्रेम और लगातार वैचारिक मार्गदर्शन पर आधारित है।