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शरई अहकाम | अय्याम-ए-फ़ातिमिया में खुशी की तकरीबों का आयोजन
आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी ने ‘अज़ा-ए-फ़ातिमिया में खुशी की तकरीबों के आयोजन’ के संबंध में पूछे गए एक शरई सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस | नेत्रहीनता और दूरदृष्टि के अभाव में अंतर
अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) ने एक हदीस में इंसान की बाहरी दृष्टि और आंतरिक अंतर्दृष्टि के बीच अंतर की ओर संकेत किया है।
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शरई अहकाम | अय्यामे फ़ातिमिया में नज़र की रकम का उपयोग
शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई ने “अय्यामे फ़ातिमिया में नज़र के धन के उपयोग” से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस | महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता देना
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने एक हदीस में विचारों के प्रबंधन और महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता की ओर संकेत किया है।
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शरई अहकाम | वुज़ू ए जबीरा
शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई ने ‘जबीरा वुज़ू’ से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है।
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इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.) : इबादत, दुआ और हुक़ूक़ ए इंसान
इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.) के जन्मदिवस के अवसर पर लिखे गए इस विशेष लेख में मौलाना सय्यद अली हाशिम आबिदी ने सहीफ़ा-ए-सज्जादिया, रिसालतुल हुकूक और इमाम (अ.) के जीवनचरित्र के प्रकाश में इबादत, ईश्वर की पहचान और मानवाधिकारों के उन पहलुओं को उजागर किया है, जो आज भी एक आदर्श समाज के निर्माण में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
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शरई अहकाम | महंगाई के दौर में पुराने सामान को नई कीमत पर बेचना
शहीद आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई ने महंगाई के दौर में पुराने सामान को नई कीमत पर बेचने से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस | शिया होने की पहचान का मापदंड
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा ने एक रिवायत में अहले-बैत (अ) से संबंध रखने की पहचान का मापदंड बताया है।
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जर्मनी में छात्र आंदोलन की नई लहर की आहट; 31 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान
जर्मनी के छात्र संगठनों और वामपंथी पार्टी ‘डी लिंके’ ने 31 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शनों का समर्थन किया है। इन प्रदर्शनों के माध्यम से शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने और पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की मांग की जाएगी। वहीं, राज्य के अधिकारी फ्रांस की तरह व्यापक जन आंदोलनों के फैलने की आशंका को लेकर चिंतित हैं।
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अशआर | क्या मेरी आँखें तेरे दीदार के क़ाबिल नहीं?
अहले-बैत (अ) के शायर जनाब सलमान आबिदी के इमाम ज़माना (अ) की शान में अशआर प्रस्तुत हैं।
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अय्याम-ए-फ़ातिमिया: हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की मज़लूमियत और उम्मत की बेदारी का पैग़ाम
जब इस्लाम के इतिहास के पन्नों पर नज़र डाली जाती है, तो एक ऐसी महान हस्ती का नाम सामने आता है, जिनका जीवन नबूवत के नूर से रोशन था, जिनका किरदार पवित्रता और पाकीज़गी का प्रतीक था, जिनकी इबादत बंदगी की बुलंदी थी और जिनकी मज़लूमियत इंसानियत के दिल को दर्द से भर देने वाली दास्तान है।
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शरई अहकाम | टाइल्स और सिरेमिक पर सज्दा करने का हुक्म
आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने टाइल्स और सिरेमिक पर सज्दा करने से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस | क़यामत के दिन हज़रत फ़ातेमा (स) की शफ़ाअत
हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) ने एक रिवायत में क़यामत के दिन शफ़ाअत के महत्व और उसके स्थान का उल्लेख किया है।
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शहादत ए हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) : सदियों पर आधारित शिया दृष्टिकोण
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) की वफ़ात के बाद हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) का संक्षिप्त जीवनकाल अनेक कठिनाइयों, दुखों और तकलीफ़ों के बीच गुज़रा। शिया रिवायतों में इन घटनाओं का उल्लेख विशेष रूप से अमीरुल मोमिनीन इमाम अली (अ) के इमामत और विलायत के अधिकार की रक्षा तथा उनके साथ पेश आए हालात के संदर्भ में मिलता है।
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शरई अहकाम | ख़ुत्बे के दौरान बातचीत करना
आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने जुमे के ख़ुत्बे के दौरान बातचीत करने से संबंधित एक शरई सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस | हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) की फ़ज़ीलत
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) ने एक हदीस में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) के बुलंद मक़ाम का उल्लेख किया है।
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हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की ‘वफ़ात’ और ‘शहादत’ में विरोधाभास से जुड़ी शंकाओं का जवाब
कुछ लोगों ने यह शंका व्यक्त की है कि शिया विद्वान और बुज़ुर्ग स्वयं भी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की शहादत को स्वीकार नहीं करते, क्योंकि वे आपके लिए ‘वफ़ात’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इस शंका के जवाब में कहा जा सकता है कि ‘वफ़ात’ शब्द का प्रयोग प्राकृतिक मृत्यु और शहादत, दोनों के लिए किया जाता है। शिया और सुन्नी विद्वानों की पुस्तकों में अन्य शहीदों के लिए भी इसी शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
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‘सीरत निगारी-ए-फ़ातिमा ज़हरा (स)’
मौलाना डॉ. सय्यद शहवार हुसैन नक़वी की पुस्तक ‘सीरत निगारी-ए-फ़ातिमा ज़हरा (स)’ भारतीय उपमहाद्वीप में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की जीवनी पर किए गए लेखन, संकलन और अनुवाद संबंधी कार्यों का परिचय प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक इस विषय पर आगे शैक्षणिक और शोध कार्य करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका की भूमिका निभाती है।
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शरई अहकाम | वॉशिंग मशीन से कपड़ों को पाक करने का हुक्म
आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने वॉशिंग मशीन से कपड़ों को पाक करने के संबंध में पूछे गए एक शरई सवाल का जवाब दिया है।
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दिन की हदीस | हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की तस्बीह की फ़ज़ीलत
इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) ने एक रिवायत में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की तस्बीह के उच्च स्थान और उसकी फ़ज़ीलत का उल्लेख किया है।