शनिवार 7 मार्च 2026 - 18:50
आयतुल्लाह ख़ामेनई ने किसी विशेष व्यक्ति का सुप्रीम लीडर के लिए वसीयत या संकेत नही कियाः आयतुल्लाह काबी

सुप्रीम लीडर के विशेषज्ञो की परिषद के सदस्य आयतुल्लाह अब्बास काबी ने कहा कि सभी क़राइन और शवाहिद से जाहिर होता है कि शहीद इमाम हज़रत आयुत्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई की राय यह थी कि नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद् अपने क़ानूनी और शरई फऱाइज़ के अनुसार मानदंडो और सिद्धांतो के आधार पर निर्णय करे। उन्होने किसी विशेष व्यक्ति के सुप्रीम लीडर होने की कोई निशानदही नही की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आयतुल्लाह अब्बास काबी ने अपने पैग़ाम मे बताया कि नेतृत्व विशेषज्ञो की परिषद की शोध कमीशन कई बार शहीद आयतुल्लाहिल उज़्मा इमाम ख़ामेनई की सेवा मे उपस्थित हुई। एक बैठक मे उन्होने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि आप लोग नेतृ्तव के मानदंड और विशेषताओ को स्पष्ट रूप से इस्तिखराज करें और इसी बुनयाद पर अमल करें।

उन्होने कहाः इस उद्देश्य के लिए आरम्भ मे एक कमैटी गठित की गई जिसके सदस्यो मे स्वर्गीय आयतुल्लाह सय्यद महमूद शाहरूदी , शहीद आयतुल्लाह इब्राहीम रईसी, आयतुल्लाह सय्यद अहमद ख़ातमी, आयतुल्लाह मोहसिन क़ुमी और मै स्वंय शामिल था। हमने नेतृत्व के लिए कुछ क़ानून और मानदड बनाए और बाद की बैठको मे उस अमल और उस मानदड की रिपोर्ट शहीद इमाम की सेवा मे पेश की।

आयतुल्लाह काबी ने कहाः इमाम ख़ामेनई ने फ़रमाया सभी विशेषताओ मे सर्वाधिक महत्व नेतृत्व के माली तक़वी (माली दयानतदारी) को हासिल है क्योकि सुप्रीम लीडर के व्यापक अधिकार और कर्तव्यो को ध्यान मे रख कर अगर माली विचलन पैदा हो जाए तो उसके प्रभाव दूसरे सभी कामो पर भी पड़ सकते है अतः माली तक़वा को विशेष रूपस से गंभीरता से ध्यान मे रखें।

एक दूसरी बैठक  मे उन्होने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के सुप्रीम लीडर को इस्लामी क्रांति के बुनयादी सिद्धांतो पर मजबूत यक़ीन, बसीरत, दुशमन की पहचान, फ़ितनो की पहचान, उपनिवेशवाद के खिलाफ स्टैंड, और विशेष रूप से अमेरिका और ज़ायोनी सरकार के खिलाफ प्रयास और प्रतिरोध पर ईमान होना चाहिए।

लीडर के विशेषज्ञो की परिषद के पांचवे दौर के अंत मे आयोजित एक और बैठक मे हुज्जतुल इस्लाम काज़रूनी (अर्बज़ प्रातं के प्रतिनिधि) ने शहीद इमाम से आग्रह किया कि यदि वह भविष्य के सुप्रीम लीडर का नाम ज़ाहिर तौर पर नही बताना चाहते तो कम से कम कोई संकेत या मार्गदर्शन दे दें ताकि नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद उसी तरह मार्ग पा सके जैसे इमाम ख़ुमैनी (र) ने आपकी ओर इशारा किया था। इसके जवाब मे इमाम ख़ामेनई ने फ़रमायाः इसकी आवश्यकता नही है। चिंता न करें। अल्लाह मदद करेगा और आप मार्ग खोज लेंगे। उन्होने आगे कहा इमाम खुमैनी के स्वर्गवास के पश्चात हम एक अंधेरी गली मे प्रवेश कर गए थे लेकिन अल्लाह की मदद और इमाम ज़माना (अ) की इनायत से मार्ग रोशन हो गया। अब स्थिति उस तरह की नही है, अब कुछ रौशन रास्ते मौजूद है और आप उन्हे खोज लेंगे। अल्लाह तआला दिलो का मार्गदर्शन करेगा।

आयतुल्लाह काबी ने आगे कहाः इससे भी पहले क़ानून की धारा 107 और 109 से संबंधित कमैटी के सदस्य जिसमे आयतुल्लाह यज़्दी, आयतुल्लाह शबिस्तरी और आयतुल्लाह वाफ़ी शामिल थे, ने भी इमाम ख़ामेनई से आग्रह किया कि वह किसी विशेष व्यक्तित की निशानदही करें। मगर उन्होने ऐसा करने से इंकार किया और फ़रमायाः यह कर्तव्य नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद का है। यहा तक कि जब कमैटी ने अपने संभावित नाम प्रस्तुत करना चाहै तो  इमाम ख़ामेनई ने उन नामो को भी सुनने से परहेज किया।

अतः तमाम शवाहिद और कराइन से स्पष्ट होता है कि शहीद इमाम आयतुल्लाह ख़ामेनई की राय यही थी कि नेतृत्व की विशेषज्ञ परिषद स्वंय तय शुदा मानदंडो और शरई फरीज़ा के अनुसार निर्णय ले और उन्होने भविष्य के सुप्रीम लीडर के लिए किसी विशेष व्यक्ति की वसीयत या इशारा नही किया।

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