शुक्रवार 27 मार्च 2026 - 18:36
सुपर पावर की सैन्य प्रतिष्ठा का ध्वस्त होना इस्लामी क्रांति के आदर्शों पर जनता की दृढ़ता का परिणाम है

मशहद के इमाम जुमा आयतुल्लाह अलम उल हुदा ने कहा कि आज इस्लामी गणराज्य की जो ताकत और प्रतिरोध मोर्चे की शानदार स्थिति है, वह संग्रामियों के संघर्ष और जनता के अद्वितीय धैर्य की बदौलत है। क्षेत्र में महाशक्तियों की सैन्य प्रतिष्ठा का भंग होना और दुश्मनों के ढोंग का ध्वस्त होना सीधे तौर पर ईरानी जनता के इस्लामी क्रांति के आदर्शों पर डटे रहने का परिणाम है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मशहद के इमाम जुमा आयतुल्लाह अलम उल हुदा ने कहा कि आज इस्लामी गणराज्य की जो ताकत और प्रतिरोध मोर्चे की शानदार स्थिति है, वह संग्रामियों के संघर्ष और जनता के अद्वितीय धैर्य की बदौलत है। क्षेत्र में महाशक्तियों की सैन्य प्रतिष्ठा का भंग होना और दुश्मनों के ढोंग का ध्वस्त होना सीधे तौर पर ईरानी जनता के इस्लामी क्रांति के आदर्शों पर डटे रहने का परिणाम है।

उन्होंने इमाम खुमैनी (र) के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम ने ईरानी जनता को ऐसी जनता बताया था जो भविष्य में अजेय होगी और हर हमले का करारा जवाब देगी। दुश्मन हमला करने की सोच भी नहीं पाएंगे।

आयतुल्लाह अलम उल हुदा ने कहा कि दुश्मनों की वर्तमान कमज़ोरी जनता के धैर्य का परिणाम है। आज वह ताकत जिसका कोई खुलकर विरोध नहीं कर सकता था, वैश्विक स्तर पर कमज़ोरी, निष्क्रियता और लाचारी का शिकार दिख रही है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन जनता के वीराना भरे मैदान में उतरने और संग्रामियों की वीरता का नतीजा है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान स्थिति ऐसी है जैसे मालिक अश्तर (हज़रत अली के सेनापति) मुआविया के खेमे के करीब पहुँच गए थे। 95 प्रतिशत अमेरिकी ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं या निष्क्रिय हो गए हैं। दो हज़ार से अधिक मिसाइलें अमेरिका और इस्राइल के हितों पर लगी हैं, और हैफा व तेल अवीव शहरों को गंभीर क्षति पहुँची है। यह घटनाएँ दुश्मन की सैन्य प्रतिष्ठा के पतन का संकेत हैं।

आयतुल्लाह अलम उल हुदा ने कहा कि युद्ध की समाप्ति का मतलब यह होना चाहिए कि दुश्मन युद्ध की सोच भी न कर सके। अतीत के अनुभव बताते हैं कि जब भी हम ताकत के चरम पर बातचीत की ओर गए, नुकसान उठाना पड़ा। जो लोग आज युद्धविराम और वार्ता की बात कर रहे हैं, वह सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में ख़वारिज की भूमिका निभा रहे हैं, इनसे सावधान रहना चाहिए।

मशहद के इमाम जुमेा ने इस बात पर बल दिया कि इस्लामी पहचान ही ईरान की ताकत का मूल तत्व है। सेपाह और प्रतिरोध बल धार्मिक और आस्था के आधार से जुड़े होने के कारण एकजुट होकर काम करते हैं। जनता को अपने नारों और आंदोलनों में इस्लामी होने को केंद्र में रखना चाहिए और अल्लाह और अहले बैत (अ) की वलायत से जुड़ाव को विजय का रहस्य समझना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था वलायत की नींव पर स्थापित है और ईरान की जनता नेतृत्व के साथ खड़ी है। जनता रास्ते और कार्यों की पहचान के लिए नेतृत्व को मापदंड मानती है। वर्तमान संवेदनशील स्थिति में नेतृत्व के अलावा हर दूसरी आवाज़ "गलत आवाज़" मानी जाएगी।

आयतुल्लाह अलम उल हुदा ने कहा कि मनुष्य की उम्र ईश्वरीय पूंजियों का समूह है। इंसान को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह अपनी उम्र की पूंजी को अल्लाह की आज्ञाकारिता के मार्ग में लगाए और इसे शैतान की चरागाह न बनने दे। इमाम सज्जाद (अ) की दुआ का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इंसान को उतनी ही आयु चाहिए जो बंदगी में व्यतीत हो। यदि उम्र शैतान के प्रभाव का क्षेत्र बन जाए, तो उससे पहले मृत्यु माँगनी चाहिए कि अल्लाह का क्रोध न आ जाए। उम्र केवल दिन-रात का गुजरना नहीं है, बल्कि यह विचार, भावना और शारीरिक क्षमता तीन पूंजियों का समूह है। शैतान गुनाह को सजाकर मनुष्य का मार्ग बदल देता है। जब ये पूंजियाँ शैतान के बहकावे में लग जाएँ, तो उम्र शैतान की चरागाह बन जाती है और इसका परिणाम अल्लाह के क्रोध और ग़ज़ब में गिरना है। इससे मुक्ति का मार्ग इरादा और सचेत होकर आज्ञाकारिता की ओर लौटना है।

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