रविवार 19 अप्रैल 2026 - 08:05
हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद ख़ामेनई और बाकी शहीदों की याद में मजलिस का आयोजन

हौज़ा / सुल्तानपुर,शनिवार को अमहट में शहीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई और बाकी शोहदा की याद में एक मजलिसे अज़ा का आयोजन किया गया जिसमें भारत में वली ए फकीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अब्दुल मजीद हकीम ईलाही ने भी शिरकत की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,उत्तर प्रदेश / सुल्तानपुर: शनिवार को अमहट में शहीद हज़रत आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई और बाकी शोहदा की याद में एक मजलिसे अज़ा का आयोजन किया गया, जिसमें भारत में वली ए फकीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम ईलाही ने भी शिरकत की।

मोमनीन ए अमहट की तरफ से मुस्लिमों के विश्व धर्मगुरु सैयद अली ख़ामेनई की याद में उनकी रूह की शांति के लिए 18 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक हुसैनिया नौतामीर, अमहट में इस मजलिस का आयोजन किया गया।

जिसे मौलाना सिब्तैन अब्बास रिज़वी (दिल्ली), मौलाना ग़ज़नफ़र अब्बास तूसी (दिल्ली), मौलाना कमर हसनैन (दिल्ली) और मौलाना डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम ए इलाही ईरानी कल्चर हाउस, नई दिल्ली) ने पढ़ी।

उन्होंने अपनी तकरीर में कहा,जिस तरह भारत में रहने वाले हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई  हर धर्म के लोगों — बूढ़े, जवान, बच्चे हर एक के अंदर इंसानियत, मानवता और एकता पाई जाती है, वह पूरे विश्व में कहीं नहीं है। यही वजह है कि भारत देश अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। काश! यही भारत के लोग 1400 साल पहले कर्बला में होते, तो इमाम हुसैन और उनके 72 साथी शहीद न किए जाते।

उन्होंने कहा,शहीद अपने पूरे कुनबे की शहादत पेश करके पूरी इंसानियत को बचा लेता है और अपनी आख़िरत संवार लेता है, इसलिए उसका नाम अमर रहता है।

उन्होंने आगे कहा,भारत देश के हर धर्म के लोगों ने हमारे लीडर सैयद अली ख़ामेनई की शहादत पर हमारे ग़म में शामिल होकर जो हौसला हमें दिया, उसे हम कभी नहीं भूल सकते। हम ख़ुदा से दुआ करते हैं कि भारत के लोग फलें-फूलें और उनके अंदर इंसानियत, मानवता और एकता का हौसला बाकी रहे।"

इस प्रोग्राम में सुलतानपुर जनपद व अन्य जनपदों के उलेमा, मोमनीन और गणमान्य लोगों ने भारी संख्या में शिरकत की।इसकी जानकारी हैदर अब्बास खान (अध्यक्ष, हुसैनी शिया वेलफेयर एसोसिएशन, सुलतानपुर) ने दी है।

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