हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , अरबईन की सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक समिति के प्रमुख, हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन अहमदी ने बताया है कि इस समय ईरान के विभिन्न शहरों और प्रांतों की गलियों और चौकों में लगभग 200 विदेशी मौकब अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इन मौकबों का उद्देश्य ईरानी जनता के साथ एकजुटता का इज़हार करना है। इनमें से अधिकतर, यानी 120 मौकब इराक के हैं।
यह बात उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि कार्यालय में आयोजित एक संयुक्त ईरानी-इराकी बैठक के दौरान कही। इस बैठक का उद्देश्य वर्ष 2026 की भव्य अरबईन यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करना और आगामी योजनाओं पर चर्चा करना था।
हुज्जतुल इस्लाम अहमदी ने विशेष रूप से इस बात की प्रशंसा की कि इराकी मौकब संचालक इस समय ईरान में मौजूद हैं, जबकि ईरान जंग-ए-रमज़ान से गुजर रहा है एक ऐसी जंग जो इज़राइल की आक्रामकता के खिलाफ लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि इराकी जनता का यह कारवाँ ईरानी कौम से अपना प्रेम और समर्थन का पैग़ाम दे रहा है।
इस अवसर पर ईरान के सांस्कृतिक सलाहकार हुज्जतुल-इस्लाम अबाज़री ने कहा कि आने वाला अरबईन बिल्कुल अलग होगा। उन्होंने याद दिलाया कि इराकी कौम ने तीसरी थोपी गई जंग में भी ईरान का साथ दिया था। उनका कहना था कि हमें इस महान सांस्कृतिक आंदोलन से भरपूर लाभ उठाने के लिए अपनी सभी क्षमताओं का उपयोग करना होगा।
बैठक में मौजूद ज़िम्मेदार लोगों ने अरबईन से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों पर अपने विचार व्यक्त किए। बैठक के अंत में इस वर्ष के लिए अरबईन का केंद्रीय नारा भी तय किया गया, हालाँकि इस बारे में अभी विवरण सामने नहीं आए हैं।
ज्ञात रहे कि अरबईन-ए-हुसैनी शियाओं का सबसे बड़ा जमावड़ा है, जिसमें लाखों की संख्या में ज़ाइरीन कर्बला जाते हैं।जारी वर्ष ईरानी जनता पर इज़राइली हमलों के बाद इराकी मौकबों का यह आना एक महत्वपूर्ण पैग़ाम-ए-एकजुहती माना जा रहा है।
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