हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव ने आज अपने बयान में बहरीन के शासकों के खिलाफ़ हिज़्बुल्लाह के महासचिव के हालिया बयान पर नाराज़गी जताई। शेख नईम क़ासिम ने कल अपने भाषण में बहरीन सरकार द्वारा शियाओं के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार और उन पर बढ़ते दबाव की कड़ी आलोचना की थी।
खाड़ी सहयोग परिषद ने शेख नईम क़ासिम पर बहरीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और दावा किया कि बहरीन में जिन शियाओं को दबाया गया, वे ईरान के लिए जासूसी कर रहे थे।
बहरीन सरकार ने हाल ही में बहरीनी शियाओं के खिलाफ़ दमन और दबाव की नई लहर शुरू की है। अब तक 280 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किए जाने और यातनाएं दिए जाने की खबरें सामने आई हैं।
इस बीच क्षेत्रीय राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज़ हो गई है कि कई अरब देशों ने ईरान के खिलाफ़ युद्ध के दौरान अमेरिका और इज़रायल को खुलकर अपनी ज़मीन, हवाई क्षेत्र और सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी।
हाल के दिनों में सामने आए खुलासों के अनुसार, युद्ध के दौरान इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख के संयुक्त अरब अमीरात दौरों ने अरब सरकारों और इज़रायल के बीच सुरक्षा सहयोग को उजागर कर दिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि युद्ध के दौरान यूएई और इज़रायल के बीच गुप्त सैन्य समन्वय हुआ।
सूत्रों के अनुसार, बहरीन सरकार ने भी युद्ध के दौरान अपने एयरबेस का खुलकर इस्तेमाल होने दिया। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि ईरान के मीनाब शहर के स्कूल पर किया गया हमला भी बहरीन से संचालित सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
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