शुक्रवार 12 जून 2026 - 13:03
ब्राज़ील इज़राइल संबंधों में नई दरार /राजनयिक प्रतिनिधित्व पर संकट

हौज़ा / ब्राज़ील सरकार द्वारा साओ पाउलो में इज़राइल के नए महावाणिज्यदूत की नियुक्ति को मंजूरी न देने के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव एक नए चरण में प्रवेश कर गया है। यह कदम इज़राइली राजदूत की नियुक्ति को अस्वीकार किए जाने और ग़ाज़ा युद्ध को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेदों के बाद सामने आया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ब्राज़ील सरकार ने इज़राइल द्वारा साओ पाउलो के लिए प्रस्तावित नए कॉन्सुल जनरल विवियन आइज़ेन की नियुक्ति को स्वीकृति देने से इंकार कर दिया है। इज़राइली अख़बार येदियोत अहरोनोत के अनुसार, ब्राज़ील का यह निर्णय दोनों देशों के संबंधों में बढ़ती खटास का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

ब्राज़ील इससे पहले भी इज़राइल के नामित राजदूत गाली डागान की नियुक्ति स्वीकार करने से इंकार कर चुका है। यदि वर्तमान कॉन्सुल जनरल राफ़ी अर्दरायश अपना कार्यकाल पूरा करके लौट जाते हैं और नए कॉन्सुल जनरल की नियुक्ति नहीं हो पाती, तो इज़राइल ब्राज़ील में अपने सर्वोच्च राजनयिक प्रतिनिधियों से वंचित हो सकता है, क्योंकि साओ पाउलो में ही इज़राइल का एकमात्र वाणिज्य दूतावास स्थित है।

एक रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति से बचने के लिए कॉन्सुल जनरल अर्दरायश के कार्यकाल में एक वर्ष की वृद्धि कर दी है। वहीं, ब्राज़ील में इज़राइली दूतावास के कार्य फिलहाल उप-राजदूत द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2026 के ब्राज़ीलियाई राष्ट्रपति चुनावों तक दोनों देशों के संबंधों में सुधार की संभावना कम दिखाई देती है। वर्तमान राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के मुकाबले पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो के पुत्र फ्लावियो बोल्सोनारो चुनावी मैदान में हो सकते हैं, जिन्हें इज़राइल के निकट माना जाता है।

ब्राज़ील और इज़राइल के बीच तनाव ग़ाज़ा युद्ध के बाद और बढ़ गया था, जब राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने इज़राइल पर ग़ाज़ा में जनसंहार का आरोप लगाया और तेल अवीव से ब्राज़ील के राजदूत को वापस बुला लिया था। इन बयानों के बाद दोनों देशों के संबंधों में स्पष्ट रूप से ठंडापन आ गया और राजनयिक दूरी बढ़ती चली गई।

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