नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान की भारत यात्रा एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना है। इस यात्रा को केवल एक औपचारिक मुलाकात या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदारी तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे ईरान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों की लंबी परंपरा भी है और बदलती हुई वैश्विक राजनीति की नई आवश्यकताएँ भी।
अगर आज हुर्मुज़ स्ट्रेट और बाब अल-मंदब की बात की जाए, तो क्षेत्रीय शक्ति के समीकरण में दोनों की निर्णायक भूमिका है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान के पास दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साधन है, जबकि अंसारुल्लाह आंदोलन भी बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में ऐसी स्थिति तक पहुंच चुका है कि इस जलमार्ग के यमनी हिस्से पर उसका प्रभावी नियंत्रण है।