मस्जिद केवल नमाज़ अदा करने की जगह नहीं, बल्कि ईमान को मजबूत करने, क़ुरआन और अहले-बैत की शिक्षाओं से परिचित कराने, चरित्र निर्माण, नई पीढ़ी के प्रशिक्षण, सामाजिक एकता तथा सही और गलत के बीच अंतर…