हमारे आँसुओं ने हमारे किरदार में कोई तब्दीली पैदा की? क्या हमारी मजलिसों ने हमारी फ़िक्र को बेदार किया?
कर्बला केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि इंसान के ज़मीर के सामने रखा हुआ वह आईना है, जिसमें हर दौर का इंसान अपना चेहरा देख सकता है। आशूरा केवल एक दिन नहीं है, बल्कि हक़ और बातिल के बीच…