हौज़ा / कर्बला के वाक़िये के बाद जब अहले बैत अ.स. को क़ैदी बना कर कूफ़ा लाया गया और दरबार-ए-इब्ने ज़्याद सजा तो ज़ालिम यह समझ रहा था कि उसने हक़ की आवाज़ को हमेशा के लिए ख़ामोश कर दिया है। मगर…
हौज़ा / कुरआन और हदीस कि रौशानी में, ईमानदारों पर यह ज़िम्मेदारी है कि वे न सिर्फ अपनी, बल्कि अपने परिवार की आध्यात्मिक शिक्षा और आख़िरत की सफलता के लिए भी गंभीर प्रयास करें।