हौज़ा / आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने मुबल्लिग़ीन को ताकीद की है कि वे अपनी तब्लीगी सरगर्मियों के दौरान दुरूस-ए-तफ़्सीर को ज़रूर शामिल करें ताकि समाज में क़ुरआन ज़िंदा रहे।
हौज़ा / इबादत जिन्नात और इंसान की पैदाइश का मक़सद और इंसानियत की मेराज है। लेकिन इस नुक्ते की तरफ़ ध्यान देना ज़रूरी है कि कमाल "आबिद" (इबादत करने वाला) होने में नहीं, बल्कि "अब्द" (बंदा बनने)…