“‘सिल्मुन लेमन सालामकुम व हरबुन लेमन हाराबकुम’ वाले अंश के अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया कि ज़ियारत-ए-आशूरा केवल एक ऐतिहासिक शोक-गाथा नहीं है, बल्कि यह मोमिन के उस स्थायी रुख की पहचान है जो वह…