हरम-ए-हज़रत मासूमा (स.अ.) आज भी केवल एक ज़ियारत स्थल नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षण केंद्र है। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति कुछ न कुछ लेकर जाता है—कोई शांति, कोई विश्वास, कोई दृढ़ संकल्प, और कोई आँसू।…