इमाम ज़माना (अ.) की ग़ैबत के दौर में उम्मत की वैचारिक और धार्मिक शिक्षा एवं मार्गदर्शन तथा दीन और उसके आदेशों को विकृतियों और फितनों से सुरक्षित रखने के लिए नायबत की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।