हौज़ा / एहतियाते वाजिब की बिना पर (कसीफ)गोबार को हल्क तक पहुंचाना रोज़ा को बातिल कर देता है चाहे गोबार किसी ऐसी चीज़ का हो जिसका खाना हलाल हो जैसे आटा या किसी ऐसी चीज़ का हो जिसका खाना हराम हो…