हौज़ा / अलीؑ मेरे इमाम हैं और मैं अलीؑ का ग़ुलाम हूँ यह सिर्फ़ शब्दो का संग्रह नहीं है, न ही किसी आरज़ी जज़्बे की बाज़गश्त, बल्कि यह एक ज़िंदा फ़िक्री अहद है, जो इंसान के बातिन में जन्म लेता…