आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने बेदारी-ए-शब और नमाज़-ए-शब को ख़ुदा की मारिफ़त और कुर्ब-ए-इलाही के हुसूल का मुअस्सिर ज़रिया क़रार देते हुए इंसान की रूहानी बेदारी में तफ़क्कुर और शब-ज़िंदा-दारी…