अमरोहा की अज़ादारी केवल कर्बला के ग़म को याद करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी सक़ाफ़ती और पारिवारिक रिवायत का भी प्रतीक है। यहाँ शबीह-ए-ताबूत, ज़ुलजनाह और अलमों की तैयारी जैसी अज़ाई…