आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने “ शरई उज़्र के दिनो में ज़ियारत-ए-आशूरा और दुआएं पढ़ने” से संबंधित एक इस्तिफ्ता का जवाब दिया है।