हौज़ा / आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने मुबल्लिग़ीन को ताकीद की है कि वे अपनी तब्लीगी सरगर्मियों के दौरान दुरूस-ए-तफ़्सीर को ज़रूर शामिल करें ताकि समाज में क़ुरआन ज़िंदा रहे।