हौज़ा / कर्बला के वाक़िये के बाद जब अहले बैत अ.स. को क़ैदी बना कर कूफ़ा लाया गया और दरबार-ए-इब्ने ज़्याद सजा तो ज़ालिम यह समझ रहा था कि उसने हक़ की आवाज़ को हमेशा के लिए ख़ामोश कर दिया है। मगर…