हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली सिस्तानी ने "ना-महरम लोगों से हाथ मिलाने के हुक्म" के बारे में एक सवाल का जवाब दिया है।
हौज़ा | जब तक इसमें कोई बुराई या भ्रष्टाचार न हो तब तक इसमें कोई बुराई नहीं है।
हौज़ा / मर्द के लिए किसी ना महरम औरत के चेहरे और हाथों के अलावा उसके जिस्म या बालों को देखना जायज़ नहीं है चाहे यह देखना लज्ज़त जींसी(जिस्मी)और खौफ फितना रखता हो या उसके बगैर हो जबकि यौन का इरादा…