हौज़ा / आयतुल्लाह हाशमी अलीया ने फरमाया कि माहे रमज़ान की हक़ीक़ी बरकतें सिर्फ़ खाने-पीने से परहेज़ करने का नाम नहीं हैं, बल्कि रोज़े की असली शरायत की पाबंदी और विलायत-ए-अहल-ए-बैत(अ.स.) से अमली…