इस्लामी देशों में ठहराव और पिछड़ापन कोई अपरिहार्य भाग्य नहीं है, बल्कि यह ऐसी स्थिति है जो धर्म की वास्तविकता और जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के बीच पैदा हुए विच्छेद से उत्पन्न हुई है। इस ऐतिहासिक…