अगर कोई इंसान पूरे साल बीमार रहता है, यानी रमज़ान के महीने को छोड़कर बीमार रहता है, तो उसे रोज़ों की क़ज़ा नहीं करनी पड़ती और उस पर इस मुबारक महीने के रोज़े फ़र्ज़ नहीं हैं और उसे फ़िदया (कम…