पैगंबर-ए-अकरम (स) ने एक रिवायत में बेटियों की महानता और उच्च स्थान की ओर इशारा किया है।
हौज़ा / बेटी अपनी मां को देखती है और उनसे ज़िंदगी के आदाब, शौहर से पेश आने के तरीक़े घर गृहस्थी संभालना और बच्चों की परवरिश का तरीक़ा सीखती है और अपने बाप को देख कर मर्दों के रवैये को पहचानती…