हज़रत महदी (अ) के ज़हूर होने का सही इंतज़ार करने का मतलब इस्लामी हुक्मों को रोकना नहीं है, बल्कि सच के मोर्चे पर शामिल होने के लिए एक व्यवहारिक तैयारी है। इमाम अस्र (अ) का ज़हूर होना, दबे-कुचले…
हौज़ा / इ़ंतेज़ार करने से कर्तव्य खत्म नहीं होता और न ही काम को टालने की अनुमति मिलती है। धर्म के कर्तव्यों में ढील और उनका उत्साहपूर्वक पालन न करना बिलकुल उचित नहीं है।