हौज़ा / बर्र-ए-सगीर की इल्मी तारीख़ कुछ ऐसी ख़ामोश अज़मतों से भरी हुई है जिनकी रोशनी अपने अहद को मुनव्वर करके बाद के ज़मानों में धुंधला दी गई। आयतुल्लाह सैयद मुहम्मद मोहसिन ज़ंगी पूरी रह॰ उन्हीं…