ज़ियारत-ए-आशूरा के विभिन्न अंशों की व्याख्या में यह बताया गया है कि अल्लाह और अहलेबैत (अ) के क़रीब होना कोई भौतिक या स्थानिक निकटता नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक, नैतिक, व्यवहारिक और मारफ़ती निकटता…
इस्लामी गणराज्य ईरान की वर्तमान युद्ध स्थिति के दौरान पवित्र क़ुम में जो दृश्य देखने को मिले, वे न केवल असाधारण हैं, बल्कि उम्मत-ए-मुस्लिमा की जागरूकता, सहानुभूति और आपसी जुड़ाव की एक जीवंत और…
अमेरिका और इसराइल की ओर से इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ जारी युद्ध की स्थिति के दौरान पवित्र क़ुम में स्थित भारतीय विद्वानों और छात्रों ने 'मौकिब-ए-अबा अब्दिल्लाह अल-हुसैन (अ)' की स्थापना करके…