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मौलाना सय्यद अली हाशिम आब्दी (1)

  • वो नूर उतरा तो काइनात रौशन हो गई

    भारतवो नूर उतरा तो काइनात रौशन हो गई

    हौज़ा / आग़ाज़ ए काइनात से पहले क्या था? न सम्त थी, न जेहत; न सुबह थी, न शाम; न ज़मीन थी, न आसमान, न वक़्त की गर्दिश थी, न मकान की वुसअत। एक ज़ात थी, अज़ल से बे-नियाज़, अबद तक बे-मिसाल, जिसकी…