हौज़ा / हज़रत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम की शहादत के चालीस दिन बाद मदीना एक और अज़ीम सानिहे का गवाह बना। एक रिवायत के मुताबिक 8 रबी-उस-सानी 11 हिजरी को बज़अतुल्मुस्तफ़ा, हामी-अल-मुर्तज…
हौज़ा / आग़ाज़ ए काइनात से पहले क्या था? न सम्त थी, न जेहत; न सुबह थी, न शाम; न ज़मीन थी, न आसमान, न वक़्त की गर्दिश थी, न मकान की वुसअत। एक ज़ात थी, अज़ल से बे-नियाज़, अबद तक बे-मिसाल, जिसकी…