हौज़ा / बैठक में विद्वानों ने कहा कि विद्वानों को राष्ट्र की सेवा शासकों के रूप में नहीं बल्कि सेवक के रूप में करनी चाहिए और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके देश को आगे बढ़ाना चाहिए।