हौज़ा / मरहूम आयतुल्लाह मुहम्मद हादी तल्लाही का कहना था कि हर मुस्लमान को अपने जीवन मे कम से कम एक बार मासूरा दुआओ या आमाल को ज़रूर अदा करना चाहिए।