हौज़ा / शब ए हिजरत का सबक सिर्फ़ तारीख़ का एक बाब नहीं, बल्कि हर दौर के अहल-ए-ईमान के लिए चराग़-ए-राह है। यह हमें तालीम देता है कि हक़ की बक़ा के लिए ज़ाती मुफ़ाद को क़ुर्बान करना ही ईमान की…
हौज़ा / मरजा ए तकलीद आयतुल्लाहिल उज़्मा हुसैन नूरी हमदानी ने एक संदेश में ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा इस्लामी समाज को अतीत की तुलना में कहीं अधिक इस्लाह ए ज़ात अलबनीन यानी आपसी सुलह, सहिष्णुता और…