इस ऐतिहासिक विश्लेषण में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि आशूरा की घटना केवल “कूफियों की ग़द्दारी” तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुआविया और उमवी शासन की एक राजनीतिक योजना का हिस्सा भी थी।