“‘सिल्मुन लेमन सालामकुम व हरबुन लेमन हाराबकुम’ वाले अंश के अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया कि ज़ियारत-ए-आशूरा केवल एक ऐतिहासिक शोक-गाथा नहीं है, बल्कि यह मोमिन के उस स्थायी रुख की पहचान है जो वह…
ज़ियारत-ए-आशूरा में “लानत” का मतलब गाली देना नहीं है, बल्कि ज़ालिमो को अल्लाह की रहमत से दूर करने की दुआ करना है। यह लेख बताता है कि किस तरह अहले-बैत (अ) से खिलाफत छीन लेना, उनके विरुद्ध सभी…
यज़ीद ने अपने छोटे से ख़िलाफ़त काल में ऐसे अपराध किए, जिनमें से प्रत्येक अकेला ही उसके और उसके वंश की बदनामी और कलंक के लिए पर्याप्त है। इमाम हुसैन (अ.) और उनके साथियों की शहादत तथा नबवी परिवार…