'दिल से ईमान लाने' और 'आत्मरक्षा' के बीच मूलभूत अंतर है। इस्लाम में जिहाद, धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और अत्याचार का सामना करने का एक तरीका है, न कि विचार थोपने का कोई हथियार।