जब हम आज के हालात को शिया इतिहास के आईने में देखते हैं, तो सीन नया नहीं लगता, बस किरदार बदल गए हैं और स्टेज चमकते पर्दों में बदल गया है। सच को देशद्रोह और झूठ को शायरी कहने की परंपरा वही है जो…