हौज़ा / दीनी तरबीयत वास्तव में केवल उपदेश से शुरू नहीं होती, बल्कि माता-पिता के व्यावहारिक उदाहरण बनने और धर्म को विवेक, भावनाओं और दैनिक जीवन से जोड़ने के माध्यम से विकसित होती है।