पवित्र नाम लेना और पवित्र उद्देश्य के लिए खड़ा होना, दोनों एक बात नहीं हैं। सिफ़्फ़ीन में क़ुरआन को नेज़ों पर उठाया गया था; आज मक्का और मदीना का नाम सामने है। समय बदल गया, लेकिन भावनाओं को इस्तेमाल…
हौज़ा / कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो सदियाँ बीत जाने के बाद भी कभी पुराने नहीं होते। समय की धूल उनकी चमक को धुंधला नहीं कर सकती, सल्तनतों की हैबत उनकी आवाज़ को ख़ामोश नहीं कर सकती और अकीदत के गहरे…