ख़ामेनेई की विलादत-ए-बासआदत के मौक़े पर दिल की गहराइयों से तबरीक़ व तहनीअत पेश करते हैं; ऐसी मुबारकबाद जिसमें अल्फ़ाज़ से ज़्यादा अक़ीदत, इबारत से ज़्यादा इख़लास और रस्म से ज़्यादा दिल की आवाज़…