हौज़ा / आग़ाज़ ए काइनात से पहले क्या था? न सम्त थी, न जेहत; न सुबह थी, न शाम; न ज़मीन थी, न आसमान, न वक़्त की गर्दिश थी, न मकान की वुसअत। एक ज़ात थी, अज़ल से बे-नियाज़, अबद तक बे-मिसाल, जिसकी…
9 रबीउल अव्वल उन अवसरों में से है, जिनके बारे में अलग-अलग विचार और दृष्टिकोण व्यक्त किए गए हैं। आयतुल्लाह बहजत (रह.) ने भी अपने बयानों में इस दिन और इस अवसर पर अपनाए जाने वाले व्यवहार के बारे…