शुक्रवार 29 अगस्त 2025 - 21:12
यूरोप "स्नैपबैक मैकेनिज्म" को हथियार बनाकर हमें डराना चाहता है, देश युद्ध की स्थिति में है सरकार का समर्थन जरूरी।आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी

हौज़ा / क़ुम के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने अपने संबोधन में कहा कि यूरोप हालांकि स्पष्ट रूप से अमेरिका की तरह बरजम (परमाणु समझौता) से खुलकर बाहर नहीं निकला, लेकिन उसके साथ खड़ा रहा और अब "स्नैपबैक मैकेनिज्म" के जरिए ईरान को डराने और दबाव में रखने की कोशिश कर रहा है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,क़ुम के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने अपने संबोधन में कहा कि यूरोप हालांकि स्पष्ट रूप से अमेरिका की तरह बरजम (परमाणु समझौता) से खुलकर बाहर नहीं निकला, लेकिन उसके साथ खड़ा रहा और अब "स्नैपबैक मैकेनिज्म" के जरिए ईरान को डराने और दबाव में रखने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इमाम हसन अस्करी अ.स.के उपदेश हमें तक़्वा गुनाहों से दूरी और फ़राइज़ के पालन की ओर ध्यान दिलाते हैं। इमाम अस्करी (अ.स.) फरमाते हैं कि सबसे अधिक परहेज़गार इंसान वह है जो संदिग्ध चीजों में सावधानी बरते, सबसे अच्छा आबिद (इबादत करने वाला) वह है जो फ़राइज़ को अंजाम दे, ज़ाहिद वह है जो हराम से दूर रहे और सबसे अधिक जिहाद करने वाला वह है जो गुनाहों को छोड़ दे।

आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने इमाम अस्करी अ.स. की शहादत और इमाम ज़माना अ.स.की इमामत के आगाज़ की मौके पर कहा कि हालांकि हम ग़ैबत के दौर में हैं, लेकिन इमाम (अ.स.) हमारे अमल पर नज़र रख रहे हैं, इसलिए हमें अपनी ज़िम्मेदारियों को पहचानना चाहिए।

उन्होंने सरकारी सप्ताह और शहीद राजाई, शहीद बहुनर और आयतुल्लाह रईसी की याद में कहा कि ये दिन सरकारी प्रदर्शन पेश करने का सबसे अच्छा मौका हैं। उन्होंने मौजूदा सरकार की खासियत बयान करते हुए कहा कि रहबर-ए मोअज़्ज़म (सर्वोच्च नेता) की पैरवी इसकी सबसे बड़ी ताकत है, इसलिए सभी को इस रास्ते पर रहना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हम इस वक्त युद्ध की स्थिति में हैं, इसलिए सरकार को कमजोर करने के बजाय उसका समर्थन जरूरी है। आलोचना होनी चाहिए लेकिन रचनात्मक और हल पेश करने वाली, ताकि मुश्किलें हल हों।

क़ुम के जुमे के खतीब ने कहा कि आम लोग सब्र व इस्तिक़ामत के साथ सरकार का साथ दे रहे हैं, यहां तक कि बिजली के कुछ घंटों के व्यवधान को भी बर्दाश्त करते हैं। जरूरी है कि सरकार महंगाई, अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दे।

उन्होंने कहा कि युद्ध का साया आम लोगों के सिर से हटना चाहिए ताकि लोग शांतिपूर्ण माहौल में काम कर सकें। साथ ही फिलिस्तीन और गाजा की स्थितियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि सियोनीस्ट (जायोनी) सरकार आज सबसे ज्यादा घृणित है और ईरान को हर संभव तरीके से मजलूम फिलिस्तीनियों की मदद करनी चाहिए।

आयतुल्लाह बुशहरी ने अंत में याद दिलाया कि एकता और एकजुटता नस्रते इलाही की बुनियादी शर्त है और मतभेद इस सहायता को समाप्त कर देते हैं।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha