हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ब्रिटेन के मुसलमान देश में सबसे ज़्यादा दान देने वाला तबक़ा बनकर उभरे हैं। एक भरोसेमंद ब्रिटिश इदारे की सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि मुसलमान समाज के सबसे सखी और सक्रिय दानदाता हैं।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मुसलमानों की बड़ी संख्या अपनी फलाही मदद अंतरराष्ट्रीय इंसानी परियोजनाओं के लिए देती है, लेकिन ब्रिटेन के अंदर भी कई ऐसे मौके मौजूद हैं, जिनसे रुके हुए समाजी प्रोजेक्ट्स को फिर से चालू किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुसलमानों की इस दरियादिली की बुनियाद इस्लामी तालीमात हैं, ख़ास तौर पर ज़कात और सदक़ा। फलाही इदारों में जमा होने वाली कुल रक़म में से लगभग 40 फ़ीसद ज़कात होती है, जबकि बाक़ी 60 फ़ीसद स्वेच्छा से दिए गए दान पर आधारित है।
आंकड़ों से पता चलता है कि अब तक मुसलमानों की ज़्यादातर मदद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख़र्च हुई है, जो दुनिया भर के मुसलमानों के बीच मज़बूत एकजुटता को दिखाती है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन में रहने वाले मुसलमानों में नस्ली और सांस्कृतिक बदलाव आ रहा है, जिससे स्थानीय फलाही कामों में रुचि बढ़ रही है।
ख़ास तौर पर तीसरी और चौथी पीढ़ी के युवा ब्रिटिश मुसलमान अब स्थानीय समस्याओं, जैसे बेघर लोग, ख़ुराक़ की कमी और बच्चों की ग़रीबी, को ख़त्म करने के लिए आगे आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जागरूक और शिक्षित युवा मुसलमान अपनी स्थानीय बिरादरियों में मौजूद संकटों पर तेज़ी से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो एक बहुत ही सकारात्मक और हौसला बढ़ाने वाली तरक़्क़ी है।
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